
SHREE SHARMA
115 days ago
भारतीय पौराणिक कथाओं में राजा पृथु को एक अत्यंत महत्वपूर्ण पात्र माना गया है। उन्हें भगवान विष्णु का अंशावतार और धरती का पहला 'अभिषिक्त' राजा माना जाता है। उन्हीं के नाम पर इस धरती का नाम 'पृथ्वी' पड़ा। राजा पृथु के पिता का नाम वेन था। वेन एक अत्यंत क्रूर और अधर्मी राजा था। उसने अपने राज्य में यज्ञ, दान और धर्म-कर्म पर रोक लगा दी थी और स्वयं को भगवान घोषित कर दिया था। ऋषियों ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन जब वह नहीं माना, तो ऋषियों ने अपने तपोबल से उसे मृत्युदंड दे दिया। चूंकि वेन की कोई संतान नहीं थी, इसलिए अराजकता फैलने लगी। ऋषियों ने वेन की भुजाओं का मंथन किया, जिससे एक दिव्य पुरुष और स्त्री प्रकट हुए। पुरुष: राजा पृथु (विष्णु के अंश) स्त्री: अर्चि (लक्ष्मी की अंश), जो बाद में पृथु की पत्नी बनीं। जब पृथु राजा बने, तो उन्होंने देखा कि प्रजा भूख से मर रही है। वेन के पापों के कारण धरती माता ने अपने भीतर अन्न और औषधियों को छिपा लिया था और घास उगाना बंद कर दिया था। चारों ओर अकाल पड़ा हुआ था। क्रोधित होकर राजा पृथु ने अपना धनुष उठाया और धरती को नष्ट करने के लिए उसके पीछे भागे। भयभीत होकर धरती माता ने गाय का रूप धारण किया और भागने लगीं। अंत में, धरती ने रुककर प्रार्थना की और कहा, "हे राजन! यदि आप मुझे नष्ट कर देंगे, तो आपकी प्रजा कहाँ रहेगी?" धरती ने सुझाव दिया कि यदि राजा उन्हें समतल करें और एक बछड़े के माध्यम से उनका दोहन करें, तो वह पुनः अन्न और रत्न प्रदान करेंगी। राजा पृथु ने स्वायंभुव मनु को बछड़ा बनाया और अपने हाथों से धरती का दोहन किया। इससे धरती से अनाज, फल और वनस्पतियाँ उत्पन्न हुईं। उन्होंने पहाड़ों को हटाकर जमीन को समतल किया ताकि कृषि की जा सके। महत्वपूर्ण तथ्य: क्योंकि पृथु ने धरती को जीवनदान दिया और उसे अपनी पुत्री के समान सुरक्षा दी, इसीलिए धरती का नाम 'पृथ्वी' पड़ा। राजा पृथु ने 100 अश्वमेध यज्ञ करने का संकल्प लिया था। जब वे 100वाँ यज्ञ कर रहे थे, तब इंद्र ने ईर्ष्यावश उनका घोड़ा चुरा लिया। पृथु क्रोधित हुए, लेकिन ब्रह्मा जी के समझाने पर उन्होंने इंद्र को क्षमा कर दिया। उनकी इस उदारता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु स्वयं प्रकट हुए और उन्हें वरदान दिया। राजा पृथु की कथा हमें सिखाती है कि एक शासक का धर्म केवल शासन करना नहीं, बल्कि प्रकृति का संरक्षण करना और अपनी प्रजा का पोषण करना है। वे मानवता के पहले महान राजा और कृषि विज्ञान के प्रणेता माने जाते हैं।

Comments (1)

Rama Devi Sahu
May 8, 2026
🙏‼️ Om Shree Paramatmane Namah ‼️🙏
