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“जब मन संसार से हटकर भक्ति में लगने लगे, तो समझ लेना ये तुम्हारी कोशिश नहीं, बल्कि भगवान का बुलावा है… क्योंकि हर किसी को ये सौभाग्य नहीं मिलता। अक्सर हमें लगता है कि हम अपनी मर्जी से भक्ति की राह पर चल रहे हैं, लेकिन वास्तविकता में यह एक 'ईश्वरीय निमंत्रण' की तरह होता है। इस विचार के कुछ महत्वपूर्ण पहलू इस प्रकार हैं: * कृपा का अनुभव: जब सांसारिक कोलाहल और मोह-माया से मन ऊबने लगे और शांति की तलाश में ईश्वर की ओर मुड़ने लगे, तो इसे केवल संयोग नहीं बल्कि एक 'कॉल' (पुकार) माना जाता है। * अहंकार का त्याग: यह अहसास कि "मैं" भक्ति कर रहा हूँ, धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है और यह भाव आता है कि "वे" मुझसे भक्ति करवा रहे हैं। * दुर्लभ अवसर: संसार की दौड़ में हर कोई शामिल है, लेकिन उस दौड़ से रुककर अंतर्मन की यात्रा शुरू करना वास्तव में एक बड़ा सौभाग्य है। ऐसी सोच व्यक्ति के भीतर कृतज्ञता (Gratitude) का भाव भर देती है, जिससे भक्ति और भी सरल और निस्वार्थ हो जाती है।

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Comments (2)

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Mar 31, 2026

जय श्री राम जी 🙏

shree Rana

shree Rana

Mar 31, 2026

jay shree ram🙏🙏