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जहाँ अहंकार खत्म होता है, वहीं से शिवभक्ति शुरू होती है।🙏🏻🕉️ 🙏 अहंकार को छोड़कर ही हम भगवान शिव की भक्ति कर सकते हैं। शिवभक्ति का मतलब ही है अपने आप को भगवान के चरणों में समर्पित करना। में बहुत गहराई है, शिवभक्ति हमें अपने अंदर की नकारात्मकता को दूर करने और आत्म-शुद्धि की ओर ले जाती है। 🌸

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