View SHREE SHARMA's profile
Profile

SHREE SHARMA

11 days ago

शिव पुराण की रुद्र संहिता (युद्ध खंड) में भगवान शिव के दिव्य धनुष 'पिनाक' के प्राकट्य, अलौकिक पराक्रम और दैत्यराज जंभ के संहार की अत्यंत रोचक कथा आती है। यह प्रसंग सिद्ध करता है कि महादेव का 'पिनाक' केवल एक अस्त्र नहीं, बल्कि साक्षात ब्रह्मांडीय न्याय और धर्म की रक्षा का प्रतीक है। 1. दैत्य जंभ का अत्याचार और अजेय शक्ति प्राचीन काल में जंभ नाम का एक अत्यंत मायावी और शक्तिशाली असुर हुआ। वह महाबली विरोचन और दानवराज बलि के काल का अत्यंत पराक्रमी सेनापति था। उसने ब्रह्मा जी और देवताओं की घोर तपस्या करके अनेक प्रकार के दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त कर लिए थे। वरदान और अपनी मायावी शक्तियों के मद में अंधा होकर जंभ ने स्वर्ग-लोक पर आक्रमण कर दिया। उसने देवराज इंद्र, वरुण, यम और कुबेर जैसे मुख्य लोकपालों को युद्ध में पराजित कर दिया और देवताओं के अधिकार छीन लिए। वह अपनी माया से भयानक आंधियाँ, विषैली अग्नि और पत्थरों की वर्षा करके ऋषियों के यज्ञों को विध्वंस करने लगा। 2. देवताओं का पलायन और कैलाश आगमन दैत्य जंभ की मायावी शक्ति और अत्याचारों से त्रस्त होकर संपूर्ण देवगण और मुनिजन अपनी रक्षा के लिए कैलाश पर्वत पहुँचे। उन्होंने देवाधिदेव महादेव के चरणों में शीश नवाकर कातर भाव से प्रार्थना की: "हे विश्वनाथ! हे त्रिपुरारी! असुर जंभ ने अपनी माया से तीनों लोकों को संतप्त कर दिया है। हमारे सभी दिव्यास्त्र उसकी आसुरी शक्ति के सामने निष्फल हो रहे हैं। हे प्रभु! हमारी और धर्म की रक्षा करें।" भगवान शिव ने अपने शरणागत भक्तों को अभयदान दिया और स्वयं समरांगण (युद्ध क्षेत्र) में उतरने का निश्चय किया। 3. भगवान शिव के हाथों में 'पिनाक' धनुष का प्राकट्य जब भगवान शिव युद्ध हेतु उद्यत हुए, तब संपूर्ण ब्रह्मांड के तेज और शिव-तत्व के योग से उनके हाथों में अत्यंत कांतिमान दिव्य धनुष 'पिनाक' सुशोभित हुआ: अलौकिक निर्माण: इस धनुष का निर्माण साक्षात विश्वकर्मा और भगवान शिव की इच्छा-शक्ति से हुआ था। इसकी प्रत्यंचा (डोरी) इतनी शक्तिशाली थी कि उसकी टंकार मात्र से दिशाएँ और दसों दिशाओं के दिग्गज कांप उठते थे। अमोघ प्रभाव: पिनाक धनुष से छोड़े गए बाणों को संसार की कोई भी माया या अस्त्र रोक नहीं सकता था। भगवान शिव ने अपने हाथ में विशाल पिनाक धनुष धारण किया और रणभूमि की ओर प्रस्थान किया। 4. भयंकर संग्राम और जंभ का अहंकार युद्ध क्षेत्र में भगवान शिव को देखते ही दैत्य जंभ गर्जना करता हुआ अपनी विशाल दानव-सेना के साथ उन पर टूट पड़ा। जंभ ने अपनी मायावी शक्तियों से आकाश को अंधकारमय कर दिया और भगवान शिव पर एक साथ हज़ारों आग्नेयास्त्र (अग्नि-बाण) और पर्वतास्त्र चलाए। भगवान शिव ने अत्यंत शांत भाव से अपने पिनाक धनुष की डोरी खींची और उसकी प्रचंड टंकार की! पिनाक की उस एक ही हुंकार और टंकार के भीषण कंपन से जंभ द्वारा फैलाई गई संपूर्ण माया क्षण भर में छिन्न-भिन्न हो गई। वातावरण में छाया अंधकार दूर हो गया और दैत्य-सेना के रथ व अस्त्र-शस्त्र बिखर गए। 5. 'पिनाक' के एक ही बाण से जंभ का अंत जब जंभ ने देखा कि उसकी सारी माया निष्फल हो चुकी है, तो वह अत्यंत क्रुद्ध होकर विशालकाय रूप धरकर सीधे महादेव की ओर झपटा। तब भगवान शिव ने अपने पिनाक धनुष पर एक अत्यंत तेजोमय, प्रलयंकारी और अमोघ बाण संधान किया। जैसे ही शिव जी ने पिनाक से वह बाण छोड़ा, वह काल-अग्नि की भाँति ज्वालाएँ छोड़ता हुआ दैत्य जंभ की ओर बढ़ा। उस दिव्य बाण ने जंभ के सभी कवच और अस्त्रों को भेदते हुए क्षण भर में उसका मस्तक धड़ से अलग कर दिया। मुख्य असुर के गिरते ही बची हुई दैत्य-सेना भयभीत होकर पाताल लोक की ओर भाग खड़ी हुई। 6. धर्म की पुनर्स्थापना और देवताओं का हर्ष जंभ के वध के बाद आकाश से देवताओं ने पुष्प-वर्षा की। देवराज इंद्र और संपूर्ण ऋषियों ने भगवान शिव तथा उनके पावन धनुष 'पिनाक' की जय-जयकार की। देवताओं को उनका स्वर्ग-लोक और अधिकार पुनः प्राप्त हो गए। 💡 युद्ध खंड में 'पिनाक' धनुष का संदेश शिव पुराण के अनुसार: पिनाकी महादेव: पिनाक धनुष को धारण करने के कारण ही भगवान शिव का एक प्रसिद्ध नाम 'पिनाकी' पड़ा। अधर्म का निवारण: 'पिनाक' की टंकार मनुष्य के भीतर व्याप्त काम, क्रोध, मोह और अहंकार रूपी आसुरी प्रवृत्तियों (जंभ) का संहार करने वाली मानी गई है।

Post media

Comments (2)

बरखा शर्मा

बरखा शर्मा

Aug 14, 2026

🌺har har mahadev ji🌺

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Aug 14, 2026

jay shree bholenath ji ki good afternoon 🙏