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*||🌿 स्वाध्याय 🌿||* स्वाध्याय केवल शास्त्र पढ़ना नहीं, यह स्वयं को जीवन के दर्पण में देखने की साधना है। जो मनुष्य प्रतिदिन अपने भीतर झाँकता है, वह धीरे-धीरे अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने लगता है। स्वाध्याय हमें तीन स्तरों पर बदलता है-: * मन की स्पष्टता-: विचारों का जाल सुलझने लगता है/ * बुद्धि की पवित्रता-: निर्णय शुद्ध और सत्य पर आधारित होने लगते हैं/ * आत्मा की पहचान-: भीतर की मौन चेतना प्रकट होने लगती है/ स्वाध्याय केवल पुस्तकों का नहीं, अपने अनुभवों का भी होता है; क्या सीखा, क्या खोया, क्या पाया… इन सबका शांत चिंतन ही मन को परिष्कृत और आत्मा को उज्ज्वल बनाता है। जो मनुष्य स्वाध्याय में स्थिर होता है, उसका हर दिन पहले दिन से श्रेष्ठ बन जाता है। वह संसार से नहीं भागता, वह संसार को ज्ञान की आँख से देखना सीख लेता है। उपनिषद् स्वाध्याय को मुक्ति का अनिवार्य द्वार बताते हैं। “स्वाध्यायप्रवचनाभ्यां न प्रमदितव्यम्।” स्वाध्याय और सत्संग — इनसे कभी दूर नहीं होना चाहिए। * *स्वस्थ एवं प्रसन्न रहिए, आप सभी को सुप्रभात..💐* 🕉️ *जयश्री सीताराम*

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