
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
9 days ago
पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक कुल 16 दिनों तक चलता है। वर्ष 2026 में पितृ पक्ष **26 सितंबर 2026 (शनिवार)** से शुरू होकर **10 अक्टूबर 2026 (शनिवार)** को समाप्त होगा। **पितृ प्रसन्न हैं या नहीं, यह कैसे जानें?** मान्यताओं के अनुसार, पितरों की तृप्ति या असंतोष के कुछ संकेत शास्त्रों और परंपराओं में बताए गए हैं: * **पितरों के प्रसन्न होने के संकेत:** * घर-परिवार में अचानक शांति, तालमेल और सकारात्मक वातावरण बनना। * संतान और परिवार के सदस्यों की प्रगति होना और लंबे समय से रुके कार्य बिना बाधा पूरे होना। * श्राद्ध के दिन भोजन निकालने पर कौआ, गाय या श्वान (कुत्ता) का तुरंत आकर भोजन ग्रहण करना। * स्वप्न में पूर्वजों का शांत, मुस्कुराते हुए या आशीर्वाद देते हुए दिखना। * **पितरों के अप्रसन्न (नाराज) होने के संकेत:** * घर में बिना किसी ठोस कारण के लगातार कलह, अशांति और तनाव रहना। * मेहनत के बाद भी धन की अत्यधिक बर्बादी या आर्थिक तंगी बने रहना। * वंश वृद्धि में बाधाएं आना या संतान को बार-बार कष्ट होना। * स्वप्न में पूर्वजों का रोते हुए, भूखे-प्यासे या फटे-पुराने वस्त्रों में दिखना। **पितृ पक्ष में क्या करें?** * **तर्पण और श्राद्ध:** प्रतिदिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काला तिल, जौ और कुशा मिलाकर तर्पण करें। पूर्वज की मृत्यु तिथि के दिन ही उनका मुख्य श्राद्ध कर्म करें। * **पंचबलि कर्म:** श्राद्ध के दिन भोजन में से पांच हिस्से अनिवार्य रूप से निकालें—गाय (गोबलि), कुत्ता (श्वानबलि), कौआ (काकबलि), देवगण (देवादिबलि) और चींटियों (पिपीलिकादिबलि) के लिए। * **ब्राह्मण भोज व दान:** सात्विक भोजन बनाकर किसी योग्य और संस्कारी ब्राह्मण को भोजन कराएं। सामर्थ्य अनुसार अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दान करें। * **सात्विक आचरण:** इन 16 दिनों तक घर में शांत, संयमित और पवित्र वातावरण रखें। * **पीपल की सेवा:** दोपहर के समय पीपल के वृक्ष पर जल, कच्चा दूध और काला तिल अर्पित करें और दीपक जलाएं। **पितृ पक्ष में क्या न करें?** * **तामसिक भोजन से परहेज:** घर में लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा, अंडा और बासी भोजन का पूरी तरह त्याग करें। * **निषिद्ध खाद्य पदार्थ:** श्राद्ध के भोजन और नियमित आहार में मसूर की दाल, चना, चना सत्तू, काला उड़द (कुछ परंपराओं को छोड़कर), गाजर, मूली, सरसों का साग और हींग का उपयोग वर्जित माना जाता है। * **शुभ व मांगलिक कार्य:** पितृ पक्ष पूर्णतः पूर्वजों के स्मरण और शोक-श्रद्धा का समय है, इसलिए गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह तय करना या नए मकान-वाहन की खरीदारी टालनी चाहिए। * **जीव-जंतुओं और याचक का अनादर:** घर के दरवाजे पर आए किसी भी भिक्षुक, जरूरतमंद या पशु-पक्षी (विशेषकर कौआ, कुत्ता, गाय) को भूखा न भगाएं और न ही उन्हें मारें। * **शारीरिक वर्जनाएं:** श्राद्ध कर्ता को इन दिनों बाल, दाढ़ी और नाखून काटने से बचना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। * **लोहे के बर्तनों का निषेध:** तर्पण या श्राद्ध के भोजन पकाने/परोसने में लोहे के बर्तनों का उपयोग न करें; इसके स्थान पर पीतल, तांबा, चांदी या पत्तलों का प्रयोग करें।

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