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यह सिर्फ़ एक तस्वीर नहीं है। यह पूरी ज़िंदगी को दिखाती है। अगर आप सच में इस तस्वीर को समझ सकें, तो ज़िंदगी को समझना बहुत आसान हो जाएगा। असल में, यहाँ जो *हाथी* दिख रहा है, वह आपका *अतीत* है—आपके पिछले कर्म। वह कर्म इस पेड़ को ज़ोर से हिला रहा है, और इसे जड़ से उखाड़ भी सकता है। नीचे जो *सांप* हैं, वे आपका *आने वाला भविष्य* हैं—मौत की निशानी। पेड़ की यह *डाली*, जिसे आदमी कसकर पकड़े हुए है—यह हमारी *ज़िंदगी* है। दाईं ओर जो *सफ़ेद और काले चूहे* दिख रहे हैं, वे *समय* हैं—दिन और रात। वे ज़िंदगी की इस डाली को लगातार कुतर रहे हैं। समय धीरे-धीरे खत्म हो रहा है, और एक दिन ज़िंदगी की यह डाली टूट जाएगी—तब इस आदमी की *मौत* तय है। फिर भी आप देखेंगे, आदमी का सारा ध्यान ऊपर *मधुमक्खी के छत्ते* पर है। यह *माया* है। मधुमक्खी के छत्ते से टपकता *शहद* ज़िंदगी की छोटी-छोटी *खुशियाँ* हैं, जो हमें समय-समय पर मिलती हैं। और आस-पास जो *मक्खियाँ* काट रही हैं, वे ज़िंदगी के *छोटे-छोटे दुख* हैं। इंसान इन खुशियों और दुखों में पूरी तरह से उलझा हुआ है। लेकिन अगर आप ध्यान से देखेंगे, तो पाएंगे कि भगवान नारायण तस्वीर के *बाईं ओर* खड़

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