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🚩 ।। भगवन्नाम की महिमा: महापापी अजामिल का उद्धार ।। 🚩 ✨ जब 'पुत्र मोह' बना 'मोक्ष' का कारण: अजामिल की अद्भुत कथा ✨ भक्तों, यह कथा प्रमाण है कि भगवान का नाम, चाहे किसी भी भाव से लिया जाए, अनजान में या पुत्र के मोह में ही सही, वह समस्त पापों को भस्म करने की शक्ति रखता है। 📜 कथा सार: कन्नौज का ब्राह्मण अजामिल, कुसंगति में पड़कर अपने धर्म, आचार और परिवार को भूल गया। उसने एक कुलटा दासी को पत्नी बनाया और जीवन भर पाप कर्मों में लिप्त रहा। उसका पूरा जीवन म्लेच्छप्राय बीता। 👶 पुत्र मोह और अंतिम समय: किसी पूर्व पुण्य के कारण उसने अपने सबसे छोटे पुत्र का नाम 'नारायण' रखा। उसे इस बालक से अपार मोह था। जब मृत्यु की घड़ी आई और यमराज के भयानक दूतों ने उसे पाश में बांध लिया, तो भयभीत अजामिल ने अपने पुत्र को पुकारा—'नारायण! नारायण!' ✨ भगवत्पार्षदों का आगमन: एक मरणासन्न प्राणी की कातर पुकार सुनी और पुत्र के बहाने ही सही, 'नारायण' नाम का उच्चारण होते ही भगवान विष्णु के पार्षद वहां तत्काल प्रकट हो गए। उन्होंने यमदूतों के पाश काट दिए। 🔥 भगवन्नाम का प्रताप: जब यमदूतों ने तर्क दिया कि यह महापापी है, तो पार्षदों ने समझाया: "तुम धर्मराज के सेवक हो, किन्तु तुम्हें धर्म का ज्ञान नहीं। जानकर या अनजान में भी जिसने ‘भगवान नारायण’ का नाम ले लिया, उसके पाप वैसे ही भस्म हो जाते हैं, जैसे अग्नि की एक चिंगारी से सूखी लकड़ियों का ढेर। इसने नारायण नाम लिया है, अब यह निष्पाप है।" 🙏 यमराज की सीख: यमदूत खाली हाथ लौटे और यमराज को सब बताया। यमराज ने नतमस्तक होकर कहा, "भगवान नारायण ही सर्वेश्वर हैं। मेरे दूतों, भविष्य में केवल उसी पापी को लाना जिसकी जिह्वा ने कभी भगवन्नाम न लिया हो।" 🌅 अजामिल का नया जीवन: भगवत्पार्षदों के एक क्षण के दर्शन (सत्संग) ने अजामिल का हृदय बदल दिया। उसे घोर पश्चाताप हुआ। वह घर त्यागकर हरिद्वार चला गया और गंगा तट पर कठोर तपस्या व भजन में लीन हो गया। अंत समय में, भगवान के पार्षद विमान लेकर आए और अजामिल भगवद्धाम को गया। सीख: भगवन्नाम में अद्भुत शक्ति है। नित्य प्रभु का नाम लें, कल्याण निश्चित है। इस अद्भुत कथा को शेयर करें और कमेंट में लिखें— ।। जय जय श्री हरिः ।। 🙏

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