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१. अष्ट सिद्धि नव निधि पति: हनुमान जी को आठ सिद्धियों (जैसे अणिमा, महिमा, गरिमा आदि) और नौ निधियों (कुबेर के अनमोल रत्न) का स्वामी माना गया है। माता सीता ने उन्हें वरदान दिया था— "अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता।" उनके पास वह दैवीय शक्ति है जिससे वे किसी को भी संपन्न बना सकते हैं। २. दीन दुखी के मीत: वे केवल शक्तिशाली ही नहीं, बल्कि अत्यंत कोमल हृदय के भी हैं। जो असहाय (दीन) हैं और कष्ट में हैं, हनुमान जी उनके सबसे प्रिय मित्र ('मीत') और रक्षक हैं। वे अपने भक्तों के संकटों को स्वयं पर ले लेते हैं। ३. अंजनी सुत की शरण में: माता अंजनी के पुत्र हनुमान जी की जो भी व्यक्ति शरण लेता है या उनकी भक्ति में लीन होता है। ४. सदा होय शुभ जीत: उसकी हर मार्ग पर, हर कार्य में हमेशा मंगलकारी विजय (शुभ जीत) सुनिश्चित होती है। यहाँ 'शुभ जीत' का अर्थ केवल सांसारिक सफलता नहीं, बल्कि धर्म और सत्य की राह पर मिलने वाली आत्मिक विजय भी है। निष्कर्ष यह दोहा हमें विश्वास दिलाता है कि हनुमान जी सर्वशक्तिमान होते हुए भी भक्तों के प्रति सरल हैं। यदि कोई अहंकार छोड़कर उनकी शरण में जाता है, तो हनुमान जी अपने सामर्थ्य से उसके जीवन के दुखों को हर लेते हैं और उसे सफलता का मार्ग दिखाते हैं। राधे राधे

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