
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
82 days ago
*परमा एकादशी* अधिक मास में आती है, इसलिए इसे बहुत खास माना जाता है। इसकी कथा और विधि दोनों स्कंद पुराण में बताई गई हैं। 1. *परमा एकादशी की कथा* प्राचीन समय में काम्पिल्य नगरी में सुमेधा नाम का एक ब्राह्मण अपनी पत्नी पवित्रा के साथ रहता था। वो बहुत गरीब था लेकिन भगवान विष्णु का परम भक्त था। एक बार अधिक मास आया। उस समय ऋषि कौण्डिन्य उनके घर पधारे। सुमेधा ने ऋषि से पूछा – “महाराज, गरीबी से मुक्ति और मोक्ष पाने का कोई उपाय बताइए।” तब ऋषि ने कहा – “अधिक मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को *परमा एकादशी* कहते हैं। इस दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखो, रात को जागरण करो और भगवान विष्णु की पूजा करो। इससे अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।” सुमेधा और पवित्रा ने श्रद्धा से व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उनकी गरीबी दूर हुई, उन्हें धन-धान्य, सुख और अंत में मोक्ष की प्राप्ति हुई। तब से माना जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से परमा एकादशी का व्रत करता है, उसके पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। 2. *व्रत रखने की विधि* *दशमी के दिन*: - एक समय सात्विक भोजन करें। - मन में व्रत का संकल्प लें कि अगले दिन मैं भगवान विष्णु के लिए व्रत रखूंगा। *एकादशी के दिन*: 1. *सुबह*: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। साफ वस्त्र पहनें। 2. *संकल्प*: हाथ में जल लेकर कहें – “मैं आज परमा एकादशी का व्रत करूंगा। हे श्रीहरि, मेरी सहायता करें।” 3. *पूजा*: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। पीले वस्त्र, पीले फूल, तुलसी पत्र, पंचामृत, फल और मिष्ठान अर्पित करें। 4. *पाठ-जाप*: विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा, गीता का पाठ करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें। 5. *व्रत*: - संभव हो तो निर्जला व्रत रखें। - न रख सकें तो फल, दूध, सूखे मेवे, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा ले सकते हैं। - चावल, दाल, अनाज, लहसुन-प्याज वर्जित हैं। 6. *रात*: रात्रि जागरण करें। भजन-कीर्तन करें। सोने से बचें। 7. *दान*: गरीबों को भोजन, वस्त्र, धन का दान करें। *द्वादशी के दिन – पारण*: - 12 जून 2026 को सुबह 05:13 से 07:48 के बीच पारण करें। - पहले भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करें, फिर खुद भोजन करें। - पारण के समय ब्राह्मण को भोजन और दक्षिणा देना शुभ माना जाता है। 3. *ध्यान रखने वाली बातें* - व्रत का उद्देश्य सिर्फ भूखे रहना नहीं, मन को शुद्ध रखना है। इसलिए क्रोध, झूठ, निंदा से बचें। - बीमार, बुजुर्ग और बच्चे फलाहार व्रत कर सकते हैं। - पूरा दिन भगवान के नाम-स्मरण में बिताएं। इस व्रत को करने से मन को शांति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

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