
SHREE SHARMA
264 days ago
त्रिकाल में पत्ते क्यों नहीं तोड़ने चाहिए? यह बात सनातन परंपरा, योग-तत्त्व और प्रकृति-शास्त्र से जुड़ी है। त्रिकाल का अर्थ है: प्रातःकाल मध्याह्नकाल सायंकाल इन तीन समयों में पेड़ों-पौधों को तोड़ना या काटना वर्जित बताया गया है। प्रातःकाल (भोर) इस समय पौधे रात की ओस, रस और ऊर्जा खींच रहे होते हैं। अगर इस समय पत्ते तोड़ें: पौधे की वृद्धि रुकती है रस कम हो जाता है औषधीय शक्ति घट जाती है इसीलिए आयुर्वेद कहता है: औषधि सूर्य निकलने के बाद तोड़ो। मध्याह्नकाल (दोपहर) इस समय सूर्य तेज होता है। पौधे जल और रस की रक्षा कर रहे होते हैं। अगर पत्ते तोड़ें: पौधा तनाव में आता है जल तेजी से निकलता है पौधा कमजोर हो सकता है सायंकाल (शाम) इस समय पौधे रात के लिए तैयारी करते हैं: पौधा श्वास-प्रश्वास बदलता है रात्रि-ऊर्जा जमा करता है सूक्ष्म प्राण बढ़ते हैं इस समय तोड़ने से: पौधा रात्रि में स्वस्थ नहीं रहता कीड़े/फंगस बढ़ते हैं प्रकृति का नियम पेड़ भी जीवित हैं, प्राणयुक्त हैं। वेद कहते हैं: पेड़ भी उसी ब्रह्मा का अंश है, इसलिए उसे बिना कारण दुख न दो। जब सूरज की ऊर्जा उचित होती है, तभी तोड़ना अच्छा माना गया। कब तोड़ें? सबसे अच्छा समय: सुबह 8 से 11 बजे के बीच (सूर्य निकलने के बाद, गर्मी शुरू होने से पहले) इस समय: रस संतुलित होता है पौधा कम चोट खाता है औषधीय गुण सबसे श्रेष्ठ होते हैं धार्मिक कारण दिवस के तीन समय में: 🕉️ प्राण-ऊर्जा सबसे अधिक सक्रिय होती है इसलिए: पूजा संकल्प साधना इन तीन समयों पर होती है। पेड़ काटना या पत्ते तोड़ना उस ऊर्जा को बाधित माना गया है। सारांश समय कारण क्यों नहीं तोड़ें प्रातः रस-ऊर्जा खिंचती है पौधा कमजोर दोपहर गर्मी अधिक रस जलता है शाम रात की तैयारी रोग/फंगस बढ़ते इसलिए त्रिकाल में पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए।

Comments (2)

Dev krishna Shrma
Dec 14, 2025
जय श्री कृष्ण राधे राधे बहुत ही अच्छी पोस्ट करते हो भाई साहब 🙏🙏👍👍

Pannalal Chouhan
Dec 9, 2025
जय श्री राधे कृष्णा जी राधे राधे
