
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
94 days ago
🔱॥सत्यवान और सावित्री की कथा॥🌺 01 🌹सावित्री का संकल्प: मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री अत्यंत गुणवान और तेजस्वी थी। उन्होंने द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को अपने पति के रूप में चुना। सत्यवान के पिता का राज्य छिन चुका था और वे अंधे होकर वन में कुटिया बनाकर रहते थे। 02 🌹नारद जी की भविष्यवाणी: विवाह से ठीक पहले देवर्षि नारद ने राजा अश्वपति को सचेत किया कि सत्यवान अल्पायु हैं और विवाह के ठीक एक वर्ष बाद उनकी मृत्यु निश्चित है। इसके बावजूद, सावित्री अपने निर्णय पर अडिग रही और सत्यवान से विवाह कर वन में उनकी सेवा करने लगी। 03 🌹संकट का दिन: एक वर्ष पूरा होने पर, जिस दिन सत्यवान की मृत्यु निश्चित थी, सावित्री उनके साथ जंगल में लकड़ी काटने गई। पेड़ पर कुल्हाड़ी चलाते समय अचानक सत्यवान के सिर में भयंकर दर्द हुआ और वे सावित्री की गोद में सिर रखकर अचेत हो गए। यमराज का आगमन: कुछ ही क्षणों में वहां साक्षात मृत्यु के देवता यमराज प्रकट हुए। उन्होंने सत्यवान के शरीर से उनके अंगूठे के आकार के जीवात्मा (प्राण) को निकाला और दक्षिण दिशा की ओर चल दिए। 04 🌹सावित्री का पीछा और संवाद: सावित्री भी यमराज के पीछे-पीखे चलने लगी। यमराज ने उसे रोका और कहा कि संसार का यही नियम है, अब तुम्हारा और सत्यवान का साथ यहीं तक था। इस पर सावित्री ने हार नहीं मानी। उसने यमराज के साथ चलते हुए धर्म, विवेक, सत्य और संतों के संग के महत्व पर अत्यंत सुंदर और नीतिपूर्ण बातें कहीं। 05 🌹चतुरता से वरदान की प्राप्ति: सावित्री के वचनों से प्रसन्न होकर यमराज ने उसे सत्यवान के प्राणों के अतिरिक्त तीन वरदान मांगने को कहा: पहले वर में सावित्री ने अपने ससुर की आंखों की रोशनी और खोया हुआ राज्य वापस मांगा। दूसरे वर में उसने अपने पिता के लिए सौ पुत्रों का वरदान मांगा ताकि उनका वंश आगे बढ़े। तीसरे वर में उसने चतुराई से स्वयं के लिए सौ यशस्वी पुत्रों की माता बनने का वरदान मांग लिया। 06 🌹सत्य की विजय: यमराज ने बिना सोचे-समझे 'तथास्तु' (ऐसा ही हो) कह दिया। इसके बाद सावित्री ने हाथ जोड़कर यमराज से कहा—"हे प्रभु! एक पतिव्रता नारी के लिए अपने पति के बिना मां बनना कैसे संभव है? आपने मुझे सौ पुत्रों का वरदान दिया है, इसलिए आपको मेरे पति के प्राण लौटाने ही होंगे।" अमर सुहाग: यमराज अपनी ही बात के जाल में बंध गए। वे सावित्री की इस अद्भुत बुद्धिमत्ता, साहस और पातिव्रत्य धर्म से पराजित हो गए। उन्होंने सहर्ष सत्यवान के प्राण वापस लौटा दिए। सत्यवान वन में फिर से जीवित हो उठे और यमराज के वरदान से उनका पूरा परिवार सुखी और समृद्ध हो गया। 🙏॥ जय सत्य सनातन ॥👍

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