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यह सप्ताह धर्म के लिये सबसे बड़े बलिदान के रूप में जाना जाता है। उनके त्याग, साहस और अद्वितीय बलिदान को नमन करने का पावन अवसर है, अपने श्रद्धासुमन अर्पण करने का पावन अवसर है। उस कालखंड के सबसे अमीर व्यक्ति दिवान टोडरमल थे। वजीर खान ने अमर बलिदानियों के अंतिम संस्कार के लिये जगह नहीं दी थी, तब गुरु गोबिंद सिंह के छोटे बेटों, साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह और साहिबज़ादा फतेह सिंह, और उनकी दादी माता गुजरी जी के अंतिम संस्कार दीवान टोडरमल ने करवाया था, जिन्होंने इसके लिए सोने की मोहरों से ढकी ज़मीन खरीदी और यह पवित्र स्थान आज गुरुद्वारा श्री ज्योति स्वरूप साहिब के नाम से जाना जाता है। यह भारतीय इतिहास का सबसे महंगा अंतिम संस्कार भी है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिये सन्देश भी है कि धर्म और राष्ट्र पर कोई आंच आये,तो बालक भी वीर बन जाते है। निकलती सांस बोलेगी, हमारी लाश बोलेगी। यही दीवार बोलेगी, हजारों साल बोलेगी। कोटिशः नमन 🙏

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Comments (2)

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Dec 26, 2025

बेवकूफ इंसानों को कौन समझाए लाल सिंह जी🙏