
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
193 days ago
राजस्थान के माउंट आबू में स्थित दिलवाड़ा मंदिर अपनी शीतलता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। रेगिस्तान के पास होने और बाहर भीषण गर्मी होने के बावजूद यह मंदिर अंदर से एकदम ठंडा रहता है। इसके पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं—एक वैज्ञानिक और दूसरा वास्तुकला से जुड़ा: 1. सफेद संगमरमर (White Marble) का जादू दिलवाड़ा मंदिर पूरी तरह से मकराना के सफेद संगमरमर से बना है। विज्ञान के अनुसार, सफेद रंग और संगमरमर ऊष्मा (Heat) के बहुत खराब अवशोषक होते हैं। यह सूरज की किरणों को सोखने के बजाय उन्हें परावर्तित (Reflect) कर देता है, जिससे पत्थर गर्म नहीं होता। 2. वास्तुकला और वेंटिलेशन * ऊंची छतें और गुंबद: मंदिर के अंदरूनी हिस्सों में बहुत ऊंचे गुंबद और नक्काशीदार छतें हैं। गर्म हवा हमेशा ऊपर की ओर उठती है, और ऊंचाई ज्यादा होने के कारण नीचे का फर्श और बैठने की जगह ठंडी बनी रहती है। * नक्काशी का कमाल: दीवारों और खंभों पर की गई बारीक और गहरी नक्काशी हवा के प्रवाह को बनाए रखने में मदद करती है। * पहाड़ी स्थान: माउंट आबू खुद समुद्र तल से लगभग 1,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जहाँ का प्राकृतिक वातावरण ही ठंडा रहता है। > एक रोचक तथ्य: इन मंदिरों को बनाने के लिए हाथियों के जरिए संगमरमर के भारी पत्थरों को पहाड़ पर ले जाया गया था। पत्थरों को आपस में जोड़ने के लिए किसी सीमेंट का नहीं, बल्कि 'इंटरलॉकिंग' और चूने के पेस्ट का इस्तेमाल हुआ है, जो पत्थर को 'सांस लेने' की जगह देता है
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