
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
53 days ago
*परिक्रमा के नियम - विस्तार से पूरी जानकारी* 🙏🪔 अलग-अलग देवताओं की परिक्रमा की संख्या अलग-अलग है। इसका कारण भी शास्त्रों में बताया गया है: *देवताओं के अनुसार परिक्रमा के नियम* *1. शिव जी - आधी परिक्रमा* *नियम*: शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा आधी करनी चाहिए। जलहरी जहां से निकलती है वहां तक जाएं, फिर वापस उसी रास्ते से आकर दूसरी तरफ से पूरी करें। *कारण*: शिवलिंग से निकली जलधारा को _नैवेद्य_ माना जाता है। उस पर पैर नहीं रखते। इसलिए पूरी गोल परिक्रमा वर्जित है। *लाभ*: मानसिक शांति, रोग मुक्ति, मोक्ष की प्राप्ति। *2. कृष्ण जी - 4 परिक्रमा* *नियम*: मंदिर के गर्भगृह या मूर्ति के चारों ओर 4 चक्कर लगाएं। *कारण*: 4 दिशाओं के स्वामी विष्णु जी हैं और कृष्ण उनके अवतार हैं। 4 परिक्रमा से धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष - चारों पुरुषार्थ मिलते हैं। *लाभ*: मनोकामना पूर्ति, प्रेम और भक्ति में वृद्धि। *3. भैरव जी - 3 परिक्रमा* *नियम*: काल भैरव की 3 परिक्रमा करें। *कारण*: भैरव जी को _काल_ का रूप माना जाता है। 3 काल - भूत, वर्तमान, भविष्य पर उनका अधिकार है। *लाभ*: भय, शत्रु और कोर्ट-कचहरी के मुकदमों से रक्षा। *4. शनिदेव - 7 परिक्रमा* *नियम*: शनि मंदिर में 7 बार परिक्रमा करें। शनिवार को सरसों का तेल चढ़ाकर करें तो विशेष फल मिलता है। *कारण*: शनि के 7 घोड़े हैं और सप्ताह में 7 दिन। 7 परिक्रमा से साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है। *लाभ*: शनि दोष शांत, नौकरी और व्यापार में उन्नति। *5. मां दुर्गा - 1 परिक्रमा* *नियम*: देवी मंदिर की सिर्फ 1 परिक्रमा करें। *कारण*: देवी को _एक ही रूप_ में संपूर्ण माना जाता है। बार-बार चक्कर लगाने से भटकाव माना जाता है। *लाभ*: शक्ति, साहस और रक्षा मिलती है। *6. गणेश जी - 3 परिक्रमा* *नियम*: गणपति की 3 परिक्रमा करें। *कारण*: 3 गुण - सत, रज, तम। गणेश जी तीनों पर नियंत्रण रखते हैं। *लाभ*: हर काम की शुरुआत में बाधा दूर होती है। बुद्धि और विद्या मिलती है। *7. हनुमान जी - 3 परिक्रमा* *नियम*: बजरंगबली की 3 परिक्रमा करें। *कारण*: हनुमान जी त्रिदेव - ब्रह्मा, विष्णु, शिव - के अंश हैं। *लाभ*: भूत-प्रेत का भय दूर, बल और संकट मोचन। *8. श्री राम - 4 परिक्रमा* *नियम*: राम मंदिर की 4 परिक्रमा करें। *कारण*: राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। 4 वेद और 4 दिशाओं के रक्षक हैं। *लाभ*: परिवार में सुख, मर्यादा और आदर्श जीवन। *9. पीपल का पेड़ - 7 परिक्रमा* *नियम*: पीपल की 7 परिक्रमा करें। गुरुवार को करें तो सबसे शुभ। *कारण*: पीपल में ब्रह्मा, विष्णु, शिव तीनों का वास है। शनि देव भी पीपल में रहते हैं। *लाभ*: संतान प्राप्ति, धन वृद्धि, पितृ दोष शांति। --- *परिक्रमा करते समय 5 जरूरी नियम* 1. *दिशा*: हमेशा _बाएं से दाएं_ यानी घड़ी की सुई की दिशा में परिक्रमा करें। इसे _दक्षिणावर्त_ कहते हैं। 2. *मन की शुद्धि*: परिक्रमा के समय मन में मंत्र जाप करें। बातें न करें, फोन न चलाएं। 3. *नंगे पैर*: मंदिर परिसर और पीपल की परिक्रमा नंगे पैर करें। 4. *गिनती*: माला या उंगली पर गिनती रखें। बीच में टूट जाए तो फिर से शुरू करें। 5. *भाव*: सबसे जरूरी - _श्रद्धा और समर्पण_। बिना भाव के 100 परिक्रमा भी व्यर्थ हैं। *क्या न करें* - शिवलिंग की पूरी परिक्रमा न करें - गर्भवती महिलाएं तेज परिक्रमा न करें - मासिक धर्म के समय मंदिर में प्रवेश और परिक्रमा वर्जित है - परिक्रमा के बाद तुरंत पीठ करके न जाएं, थोड़ी देर प्रार्थना करें _भावार्थ_: परिक्रमा मतलब अपने अहंकार को ईश्वर के चरणों में समर्पित करना। जितनी बार चक्कर लगाओगे, उतना खुद को केंद्र यानी ईश्वर के करीब पाओगे। *ॐ नमः शिवाय* 🚩

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