MyMandirInstall

10 दिन प्यार से रखते हैं, फिर नदी नालों में कूड़े में फेंक देते हैं। इस छोटे से संवाद में पूरी सच्चाई है। हम विघ्नहर्ता को घर लाते हैं, 10 दिन पूरे भाव से पूजा करते हैं, और फिर विसर्जन के नाम पर हम क्या करते हैं? प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां, केमिकल वाले रंग, जो महीनों तक नदी में सड़ती रहती हैं, पानी को जहरीला बनाती हैं। अगर थोड़ी सी भी श्रद्धा है तो ये 3 काम जरूर करें: *1. मिट्टी के गणेश जी लाएं:* शाडू माटी या प्राकृतिक मिट्टी की छोटी मूर्ति, जो पानी में तुरंत घुल जाए। *2. घर पर ही विसर्जन करें:* एक बाल्टी / टब में विसर्जन करके उसी पवित्र मिट्टी को अपने गमलों में डाल दें। बप्पा फिर से आपके घर में ही रहेंगे, कूड़े में नहीं। *3. फूल-माला अलग करें:* नदी में सिर्फ मिट्टी जाए, प्लास्टिक, माला, सजावट नहीं। भक्ति दिखावे में नहीं, जिम्मेदारी में है। आप इसे जरूर शेयर कीजिए, कैप्शन के लिए ये लिख सकते हैं: > 🙏 10 दिन का मेहमान नहीं, जीवन भर का संस्कार है। > इस बार मिट्टी के बप्पा, घर पर विसर्जन। > #EcoFriendlyGanesh #RespectBappa गणपति बाप्पा मोरया!

Comments (2)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Sep 20, 2026

जय श्री गणेश जी 🙏 शुभ संध्या बेहन जी 🙏

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Sep 20, 2026

सही बात है 🙏 जब लाते हैं तो कितने सम्मान से लाते हैं और जब विसर्जन का समय आता है तो कही भी फेंक देते हैं। अरे वो विसर्जन के वक्त भी वही देव रहते हैं 🙏 बस मान्यताओं के अनुसार अपने धाम के लिए जा रहे होते हैं, भक्तों की सारी तकलीफें सारे दुःख अपने साथ लेके और भक्तों को शुभ आशीर्वाद देके 🙏🌹☺️ जय गणपति बप्पा 🙏🌹☺️ शुभ संध्या वंदन भाई जी 🙏🌹☺️