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*🌿 `अच्छी संगति आपके जीवन को कैसे बदल सकती है?`* *🌸 || श्रीमद्भगवद्गीता || 🌸* > 📘 अध्याय 2, श्लोक 67 _इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते।_ _तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि॥_ 📝 *सरल अर्थ:* जो मन किसी एक भटकती इंद्रिय के पीछे चल पड़ता है, वह व्यक्ति की बुद्धि को उसी तरह भटका सकता है जैसे तेज हवा पानी में नाव को भटका देती है। 🌸 *व्याख्या:* _हमारे आसपास का माहौल हमारे मन को प्रभावित करता है।_ जिस चीज़ को हम बार-बार देखते और सुनते हैं, धीरे-धीरे हमारा मन उसी दिशा में जाने लगता है। इसलिए संगति और वातावरण का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। > हर आकर्षण के पीछे भागने के बजाय यह तय करना जरूरी है कि किस चीज़ को अपने जीवन में जगह देनी है। 🪷*।। हरे कृष्णा ।।*🪷

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Comments (1)

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Sep 29, 2026

जय श्री कृष्णा राधे राधे जी🌹🙏