
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
163 days ago
हनुमान जी और गोवर्धन पर्वत से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन पौराणिक कथाओं और रामचरितमानस या वाल्मीकि रामायण के अनुसार, ऐसा कोई उल्लेख नहीं मिलता कि गोवर्धन पर्वत को हाथ लगाने से हनुमान जी का आधा शरीर पत्थर का हो गया था। हनुमान जी और गोवर्धन पर्वत का संबंध मुख्य रूप से 'राम सेतु' निर्माण की कथा से जोड़ा जाता है। प्रचलित लोक कथा कुछ इस प्रकार है: * सेतु निर्माण के लिए पत्थर: जब लंका जाने के लिए समुद्र पर सेतु बनाया जा रहा था, तब हनुमान जी हिमालय से एक विशाल पर्वत खंड (जो बाद में गोवर्धन कहलाया) उठाकर ला रहे थे। * प्रभु का संदेश: रास्ते में ही उन्हें सूचना मिली कि सेतु का कार्य पूर्ण हो गया है और अब और पत्थरों की आवश्यकता नहीं है। * पर्वत की निराशा: कहा जाता है कि वह पर्वत दुखी हो गया क्योंकि वह भगवान राम की सेवा में नहीं लग सका। तब हनुमान जी ने उसे आशीर्वाद दिया कि द्वापर युग में जब भगवान 'कृष्ण' अवतार लेंगे, तब वे तुम्हें अपनी उंगली पर उठाकर तुम्हारी पूजा करवाएंगे। कुछ महत्वपूर्ण तथ्य: * हनुमान जी 'वज्रदेही' हैं: हनुमान जी को 'वज्र' के समान कठोर और अमर शरीर का वरदान प्राप्त है, इसलिए उनके शरीर के पत्थर बनने जैसी बात शास्त्रों के विपरीत प्रतीत होती है। * श्राप की कथा: गोवर्धन पर्वत के साथ 'पत्थर' होने या छोटे होने की कथा पुलस्त्य ऋषि से जुड़ी है। माना जाता है कि पुलस्त्य ऋषि के श्राप के कारण गोवर्धन पर्वत का आकार हर दिन एक तिल के समान घटता जा रहा है। हो सकता है कि आपने किसी स्थानीय लोक कथा या काल्पनिक चित्रण के बारे में सुना हो, लेकिन मुख्य धार्मिक ग्रंथों में इसका कोई आधार नहीं है। कोन झूठ बोलता है विडिओ बनाने वाला या गूगल
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