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28.9.2026 संसार में सुखी रहने के कुछ नियम हैं। *"यदि आप उनका पालन करेंगे, तो आप सुखी रह सकते हैं।"* *"अकेले तो कोई व्यक्ति जी नहीं सकता। दूसरों से कुछ न कुछ सहयोग तो लेना ही पड़ता है। और इसके लिए दूसरों से आशा भी रखनी पड़ती है। "तो दूसरों से आशा रखें, परंतु कम रखें। दूसरों से जितनी आशाएं आप कम रखेंगे, उतना ही आप अधिक सुखी रहेंगे।"* और यह भी मन में विचार बनाकर रखें, कि *"यदि मेरी आशा पूरी हो गई तो ठीक है, और यदि नहीं हुई, तो कोई बात नहीं. दूसरा व्यक्ति कोई मेरा गुलाम तो है नहीं, जो मेरी सब आशाएं पूरी कर ही देगा."* ऐसा सोचने से आपकी आशा पूरी हो तो भी, और न हो तो भी, दोनों स्थितियों में आप सुखी रहेंगे। दूसरी बात -- *"किसी की निंदा चुगली न करें। निंदा चुगली करने से मन में अनेक प्रकार का तनाव भय और आशंकाएं पैदा हो जाती हैं। और मन की शांति खो जाती है। आज आप किसी की चुगली करेंगे। कल दूसरा भी आपकी चुगली करेगा। इसलिए इस बुरे काम से बचकर रहें, तो आप सुख से जिएंगे।"* तीसरी बात -- *"दूसरों में गुण देखें और उन्हें सीखने का प्रयत्न करें। इससे आपका सुख बढ़ेगा।"* चौथी बात -- *"आत्म निरीक्षण करते हुए अपने दोषों को देखकर उन्हें दूर करें। इससे आपका तनाव चिंताएं और दुख कम हो जाएंगे। यदि आप इतना कर लेंगे, तो निश्चित रूप से आप सुख से जी पाएंगे।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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