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जब हनुमान माता सीता की खोज में समुद्र पार करके लंका जा रहे थे, तब देवताओं को उनके बल, बुद्धि और धैर्य की परीक्षा लेने की इच्छा हुई। देवताओं ने नागमाता सुरसा को आदेश दिया कि वे हनुमान का मार्ग रोककर उनकी परीक्षा लें।🚩 🌿 समुद्र के बीच सुरसा का प्रकट होना जैसे ही हनुमान आकाश मार्ग से आगे बढ़ रहे थे, तभी विशाल रूप धारण करके सुरसा उनके सामने प्रकट हुईं। उन्होंने कहा—🚩 👉 “देवताओं ने आज तुम्हें मेरा भोजन बनाया है। मेरे मुख में प्रवेश किए बिना तुम आगे नहीं जा सकते।” हनुमान समझ गए कि यह कोई साधारण बाधा नहीं है। पहले उन्होंने विनम्रता से कहा— 👉 “मैं भगवान राम का कार्य पूरा करके लौटते समय आपके मुख में प्रवेश करूँगा।” लेकिन सुरसा नहीं मानीं। ⚡ बुद्धि और बल की परीक्षा🚩 तब हनुमान ने अपना शरीर विशाल करना शुरू किया। सुरसा भी अपना मुख और बड़ा करती गईं। हनुमान पर्वत के समान विशाल हो गए, तो सुरसा का मुख भी आकाश जितना बड़ा हो गया। अचानक हनुमान ने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया। वे तुरंत छोटे से सूक्ष्म रूप में बदल गए और पलक झपकते ही सुरसा के मुख में प्रवेश करके बाहर निकल आए। फिर हाथ जोड़कर बोले— 👉 “माता, मैंने आपके मुख में प्रवेश भी कर लिया और बाहर भी आ गया। अब मुझे जाने की अनुमति दें।” 🌸 सुरसा का आशीर्वाद🙏 हनुमान की बुद्धिमानी, विनम्रता और चतुराई देखकर सुरसा अत्यंत प्रसन्न हुईं। उन्होंने अपना असली रूप धारण किया और कहा— 👉 “वत्स, तुम बल और बुद्धि दोनों में श्रेष्ठ हो। भगवान राम का कार्य अवश्य सफल होगा।” इसके बाद उन्होंने हनुमान को आशीर्वाद देकर लंका जाने दिया। 🌟 कथा का सार🚩 👉 केवल बल ही नहीं, बुद्धि भी आवश्यक होती है 👉 विनम्रता से बड़ी से बड़ी बाधा पार की जा सकती है 👉 भगवान के कार्य में आने वाली परीक्षाएँ व्यक्ति को और महान बनाती हैं 👉 सच्चे भक्त को अंततः सफलता अवश्य मिलती है 🙏 जय बजरंगबली🙏 🙏 जय श्रीराम🙏

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Comments (3)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

May 12, 2026

🙏🏹 Jai Shree Ram 🏹 Jai Siya Ram 🏹🙏 Subha Ratri Vishram Ji 🙏🌹🌹

सविता

सविता

May 12, 2026

Ram Ram ji 🙏🌹

jeevanrathh

jeevanrathh

May 12, 2026

जय बजरंगीबली जय हनुमान