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रेगिस्तान में आसमान से दिखने वाली इन विशाल और सुंदर आकृतियों के पीछे मुख्य रूप से दो कारण हो सकते हैं: प्रकृति की कलाकारी और प्राचीन मानव सभ्यताएं। यहाँ विस्तार से बताया गया है कि ये कैसे बनीं: 1. इंसानों द्वारा बनाई गई आकृतियां (Geoglyphs) दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जहाँ इंसानों ने जानबूझकर विशाल आकृतियां बनाईं, जिन्हें केवल ऊंचाई से ही समझा जा सकता है। * नाज़का लाइन्स (पेरू): यह सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। प्राचीन नाज़का लोगों ने रेगिस्तान की ऊपरी काली चट्टानों को हटाकर नीचे की हल्की रंग की मिट्टी को उजागर किया। वहाँ बारिश बहुत कम होती है और हवाएं शांत रहती हैं, इसलिए हज़ारों सालों बाद भी ये आकृतियां (जैसे पक्षी, मकड़ी, और ज्यामितीय रेखाएं) वैसी की वैसी ही हैं। * मध्य पूर्व के 'व्हील्स': सऊदी अरब और जॉर्डन के रेगिस्तानों में पत्थर के बने विशाल चक्र और दीवारें मिली हैं, जिन्हें हज़ारों साल पहले शिकार या धार्मिक उद्देश्यों के लिए बनाया गया था। 2. हवा और प्रकृति का जादू प्रकृति अक्सर ऐसी आकृतियां बनाती है जो ऊपर से किसी पैटर्न या डिज़ाइन जैसी लगती हैं: * रेत के टीले (Dunes): हवा एक निश्चित दिशा में बहती है, जिससे रेत अर्धचंद्राकार (Barchan) या तारों (Star Dunes) जैसी आकृतियों में ढल जाती है। ऊपर से देखने पर ये किसी कलाकृति जैसी दिखती हैं। * खारे पानी के मैदान (Salt Pans): जब रेगिस्तानी इलाकों में पानी सूखता है, तो नमक और खनिजों की परतें आपस में टकराकर षट्कोण (Hexagons) या अन्य ज्यामितीय आकृतियां बना लेती हैं। 3. भूवैज्ञानिक हलचल (Geology) कभी-कभी ज़मीन के अंदर की हलचल या कटाव से अद्भुत ढांचे बनते हैं: * सहारा की आँख (Eye of the Sahara): मॉरिटानिया में एक विशाल गोलाकार आकृति है जिसे 'रिकट स्ट्रक्चर' कहते हैं। यह ज्वालामुखी या उल्कापिंड से नहीं, बल्कि लाखों सालों के भूगर्भीय कटाव (Erosion) से बनी है। संक्षेप में: या तो प्राचीन सभ्यताओं ने इन्हें अपने धर्म या संस्कृति के लिए पत्थरों को तराश कर बनाया, या फिर हवा और पानी ने लाखों सालों की मेहनत से मिट्टी और रेत को ये सुंदर रूप दिया।

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