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*🌹ईश्वर एक, रूप अनेक: संकट के समय इष्टदेव कैसे करते हैं भक्तों की रक्षा?🌹* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *⭕अध्यात्मिक क्षेत्र में उन्नति पाना हो अथवा इस संसार में सफल जीवन व्यतीत करना हो, तो ब्रह्माण्ड का सिद्धान्त याद रखें, एक ईश्वर की आराधना पूर्ण समर्पण भाव के साथ करने पर व्यक्ति सब कुछ पा लेता है। आपने आस-पास साईं बाबा के भक्त देखे होंगे, वे कहते हैं कि जब से साईं के दरबार में गए, तब से सब काम बना, इसी प्रकार बाकें बिहारी के भक्त कहते हैं कि उनकी कृपा से सब काम बना है।* आप चाहें प्रभु राम को मानें, भगवान शिव को मानें, काली की आराधना करें अथवा किसी भी देवी-देवता, परन्तु जिसकी भी आराधना करें, पूर्ण निष्ठा भाव से करें, ताकि इष्ट के रूप में उस देवता की शक्ति कल्याण कर सके। जब हम किसी संकट में पड़ जाते हैं या हमें कोई सताता है, तब हम ईश्वर की प्रार्थना करते हैं। यही वह अटूट विश्वास है जो हमें अहसास कराता है, यकीन दिलाता है कि ईश्वर है। ईश्वर वह दिव्य शक्ति है जिससे सारा संसार चलता है। वेदों के अनुसार परमपिता परमात्मा अर्थात् सबका पालनहार ईश्वर एक ही है, किंतु उसके रूप अनेक हैं। कहीं राम के रूप में ईश्वर को जाना जाता है तो कहीं कृष्ण के रूप में ईश्वर को पूजा जाता है, कहीं भगवान शिव के रूप में ईश्वर की वन्दना होती है तो कहीं काली, दुर्गा, सरस्वती के स्वरूप में ईश्वरीय शक्ति विद्यमान है। ईश्वर निराकार है, हम उसे देख नहीं सकते, किंतु उसका अहसास हमें होता है। दृष्टिभेद के कारण मानव, ईश्वर को भिन्न-भिन्न नामों से पुकारता है एवं अनेक स्वरूपों में देखता एवं पूजता है। जैसे व्यक्ति एक है, लेकिन विभिन्न रिश्तों के कारण परिवार के लोगों द्वारा पिता, भाई, चाचा, मामा, फूफा, दादा, बहनोई, भतीजा, पुत्र, भांजा, पोता, नाती आदि नामों से संबोधित होता है, वैसे ही ईश्वर भी भिन्न-भिन्न कर्ताभाव के कारण अनेक नाम वाला हो जाता है। जैसे जिस रूप में वह सृष्टिकर्ता है वह ब्रह्मा कहलाता है, जिस रूप में वह सर्वत्र व्याप्त है या जगत को धारण करने वाला है उसका नाम विष्णु है, जिस स्वरूप में वह विद्या प्रदान करता है, उसका नाम सरस्वती है, जिस रूप में वह समस्त धन-सम्पत्ति और वैभव का स्वामी है उसका नाम लक्ष्मी है। ईश्वर चेतना की वह शक्ति है जो ब्रह्माण्ड के भीतर और बाहर जो कुछ है, उस सब में व्याप्त है, संचालक होते हुए भी वह दिखाई नहीं देता क्योंकि वह सर्वव्यापी सर्वनियंत्रक है। ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से जन्मकुण्डली में स्थित ग्रह नक्षत्रों के द्वारा विधि के विधान को समझकर उनके अनुसार कार्य-व्यवहार कर आकस्मिक हानि से बचा सकता है। *🚩#जय_सियाराम🚩* 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 💐💐💐💐💐💐💐💐💐

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Comments (1)

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Jun 24, 2026

जय श्री हरि विष्णु की 🙏