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*कृष्णकथा* कृष्ण भगवान की लघु कथा: माखन चोर बालक कृष्ण अपनी माता यशोदा और पिता नंद बाबा के साथ वृंदावन में रहते थे। वे अपनी शरारतों और मीठी मुस्कान से सभी का मन मोह लेते थे। उन्हें मक्खन (माखन) बेहद पसंद था और वे अक्सर गोपियों के घरों में जाकर उनका माखन चुरा लेते थे। एक दिन, जब कृष्ण ने फिर से माखन चुराया, तो कुछ गोपियाँ शिकायत लेकर माता यशोदा के पास पहुँचीं। उन्होंने कहा, "यशोदा! तुम्हारे कान्हा ने फिर से हमारा माखन चुरा लिया है।" यह सुनकर माता यशोदा ने कृष्ण को पकड़ने की कोशिश की। कृष्ण भागे और माता यशोदा ने उनका पीछा किया। आखिरकार, उन्होंने कृष्ण को पकड़ ही लिया। माता यशोदा ने कृष्ण को डाँटते हुए कहा, "कान्हा, तुम इतनी शरारतें क्यों करते हो? तुम हर दिन माखन क्यों चुराते हो?" तब कृष्ण ने मीठी आवाज़ में जवाब दिया, "मैया, मैं माखन नहीं चुराता। मैं तो केवल अपना हिस्सा लेने आता हूँ। मैंने अपना सब कुछ तुम्हें दे दिया है—मेरी बाँसुरी, मेरा प्यार, मेरी सारी लीलाएँ। तो क्या मैं तुमसे थोड़ा सा माखन नहीं ले सकता?" यह सुनकर माता यशोदा का हृदय पिघल गया। उन्होंने कृष्ण को गले लगा लिया और समझ गईं कि उनका बेटा कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं भगवान हैं, जो सभी के हृदय से स्वार्थ और अहंकार का 'माखन' चुराकर उन्हें शुद्ध करना चाहते हैं। शिक्षा: इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भगवान कृष्ण की लीलाएँ केवल मनोरंजन नहीं हैं, बल्कि वे हमारे अंदर के स्वार्थ और अहंकार को दूर करके हमें प्रेम और भक्ति का मार्ग दिखाती हैं।

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Comments (3)

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 20, 2025

🦚🦚 जय हो यशोदा नंदन जी की। ््््््ॐ 🔹🚩 धन्यवाद जी भाई जी वेरी नाइस पोस्ट स्टोरी कोटी लाइन।। बहुत ,ही, लाजवाब जी।।🔹🌹🚩

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 20, 2025

🙏🙏🙏🙏🙏