
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
12 days ago
शुभ संध्या जय श्री राम। ईश्वर हमें रिश्ते की सौगात दे सकता है, पर उसमें मिठास, विश्वास और आदर भरना इंसान के अपने हाथों में ही होता है। पौधा चाहे कितना भी कीमती क्यों न हो, अगर समय पर समझ और अपनापन का पानी न मिले, तो वह मुरझा ही जाता है। आपके इस सुंदर विचार के साथ एक छोटी सी पंक्ति याद आती है: > *गांठ अगर लग जाए तो फिर खुलती नहीं आसानी से,* > *रिश्ते धागे जैसे हैं, इन्हें ज़रा सहेज कर रखिए।* > आज की शाम आपके लिए मंगलमय और सुखद रहे!

Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
