
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
146 days ago
🛕꧁ जय द्वारकाधीश꧂🛕 मृत्यु के देवता यमराज को आखिर 'धर्मराज' क्यों कहा जाता है? जानिए यमलोक और कर्मों के हिसाब से जुड़े कुछ रहस्य... 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ यमराज को हम प्राणी के अंत और मृत्यु के देवता के रूप में जानते हैं। चूंकि मृत्यु से सब डरते हैं, इसलिए अक्सर लोग यमराज से भी भयभीत रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनका दूसरा नाम 'धर्मराज' क्यों है? जब किसी जीव का सांसारिक कार्य पूरा हो जाता है, तब यमराज उसके प्राण इसलिए खींचते हैं ताकि आत्मा नया शरीर प्राप्त कर नए सिरे से जीवन शुरू कर सके। धर्मराज क्यों कहलाते हैं? यमपुरी (यमराज की नगरी) में उनका एक विचार भवन है, जिसे 'कालीची' कहा जाता है। वहां यमराज अपने सिंहासन पर एक निष्पक्ष न्यायमूर्ति की तरह बैठते हैं। उनके सहायक चित्रगुप्त जी सभी प्राणियों के कर्मों की बही खोलकर लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हैं। जीवों के अच्छे-बुरे कर्मों को ध्यान में रखकर यमराज बिल्कुल न्यायपूर्ण फैसला सुनाते हैं। न्याय के इसी देवता स्वरूप के कारण वे संसार में 'धर्मराज' के नाम से पूजनीय हैं। यमराज का स्वरूप और परिवार: माता-पिता: वे सूर्यदेव और माता संज्ञा के पुत्र हैं। वाहन और संदेशवाहक: उनका वाहन भैंसा है। कबूतर, उल्लू और कौवा उनके संदेशवाहक माने जाते हैं। अस्त्र-शस्त्र: उनका अचूक हथियार 'गदा' है और वे अपने हाथ के 'कालपाश' से प्राण निकालते हैं। परिवार: सुशीला, विजया और हेमनाल उनकी मुख्य पत्नियां हैं। न्याय के प्रतीक 'धर्मराज युधिष्ठिर' उनके ही पुत्र थे। बहन: यमुना नदी को यमराज की बहन माना जाता है। भाई-बहन का पवित्र त्योहार 'भैया-दूज' (यम द्वितीया) यम और यमुना के असीम प्रेम का ही प्रतीक है। यमलोक के नियम और मुक्ति का मार्ग: यमपुरी के द्वार पर चार आंखों वाले दो महाभयंकर कुत्ते पहरा देते हैं। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति भौमवारी चतुर्दशी के दिन यमतीर्थ (संकटाघाट) के दर्शन और स्नान करता है, उसे नरक की यातनाएं नहीं भोगनी पड़तीं। स्कंद पुराण के अनुसार: श्राद्धं कृत्वा यमे तीर्थे पूजयित्वा यमेश्वरम्। यमादित्यं नमस्कृत्य पितृणामनृणो भवेत्॥ (अर्थात: यमतीर्थ में श्राद्ध, यमेश्वर का पूजन और यमादित्य को प्रणाम करने से व्यक्ति पितृ-ऋण से मुक्त हो जाता है।) दीपावली और यमदीप दान: दीपावली से ठीक एक दिन पहले 'यमदीप' जलाकर यमराज की आराधना करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। एक रोचक कथा: पुराणों के अनुसार, एक बार माण्डव ऋषि ने कुपित होकर यमराज को मनुष्य योनि में जन्म लेने का श्राप दे दिया था। इसी श्राप के कारण यमराज ने दासी पुत्र के रूप में जन्म लिया था और वे धृतराष्ट्र तथा पाण्डु के भाई 'महात्मा विदुर' कहलाए। मनुष्य जन्म लेकर भी वे भगवान के परम भक्त और जीवन भर धर्म-परायण ही बने रहे *🔱शिव.शिव.शिव.शिव.शिव.li 🔱* 🔱शिव.शिव.शिव.शिव.li 🔱 *🔱शिव.शिव.शिव.li 🔱*

Comments (2)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Apr 6, 2026
जय भोले नाथ जी 🙏

Rama Devi Sahu
Apr 6, 2026
Vishesh Jankariyan ke liye Bahut bahut Dhanyawad Jii 🙏 Har Har Mahadev 🔱🙏
