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विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय। नागार्तिनाथ श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते।। नमो नमः! श्री गणेश स्तोत्र की ये सुंदर पंक्तियाँ मन को बहुत शांति और सकारात्मकता प्रदान करती हैं। यह श्लोक भगवान गणेश के दिव्य स्वरूप और उनकी महिमा का अद्भुत वर्णन है। यहाँ इस श्लोक का सरल अर्थ दिया गया है: श्लोक का भावार्थ * विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय: विघ्नों के स्वामी, वरदान देने वाले और देवताओं के प्रिय। * लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय: विशाल उदर वाले, सभी कलाओं के ज्ञाता और जगत का कल्याण करने वाले। * नागार्तिनाथ श्रुतियज्ञविभूषिताय: जो नागों के कष्टों को दूर करने वाले (या नाग को यज्ञोपवीत रूप में धारण करने वाले) और वेदों व यज्ञों से सुशोभित हैं। * गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते: माता पार्वती के पुत्र और गणों के स्वामी, आपको बारंबार नमस्कार है। 🚩🚩🙏🏻ॐ श्री गणेशाय नमः🙏🏻🚩🚩

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