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सनातन परंपरा के अनुसार **स्वास्तिक** बनाने की सही विधि और उसके हर एक अंग के आध्यात्मिक व दार्शनिक अर्थ को दर्शाया गया है। अक्सर लोग स्वास्तिक बनाते समय दो रेखाओं को आपस में काट देते हैं, जिसे शास्त्रों में वर्जित माना गया है क्योंकि इससे 'ब्रह्म स्थान' कटता है। वीडियो में दर्शाए गए चरणों और उनके प्रतीकों का विस्तार से विवरण: **1. चार मुख्य दिशाएं (पुरुषार्थ चतुष्टय)** केंद्र से बाहर की ओर चार भुजाएं खींची जाती हैं, जो जीवन के चार प्रमुख लक्ष्यों को दर्शाती हैं: * **धर्म:** कर्तव्य, नीति और सत्य का मार्ग। * **अर्थ:** धर्मसम्मत भौतिक समृद्धि और आजीविका। * **काम:** सांसारिक सुख और सकारात्मक इच्छाएं। * **मोक्ष:** जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति और अंतिम लक्ष्य। **2. चार मुड़ी हुई रेखाएं (मुक्ति के चार प्रकार)** चारों भुजाओं को घड़ी की दिशा (दक्षिणावर्त) में आगे बढ़ाना आत्मा की चार प्रकार की मुक्तियों को दर्शाता है: * **सालोक्य:** भगवान के लोक में स्थान प्राप्त करना। * **सामीप्य:** ईश्वर के सान्निध्य या निकटता का अनुभव। * **सारूप्य:** ईश्वर के स्वरूप के समान दिव्य गुण प्राप्त करना। * **सायुज्य:** परमात्मा के साथ पूर्ण एकाकार (लय) हो जाना। **3. ऊपर की ओर उठी शाखाएं (अंतःकरण चतुष्टय)** भुजाओं के सिरों को ऊपर की ओर मोड़ना मानव चेतना और अंतःकरण की चार शक्तियों का प्रतीक है: * **मन:** संकल्प-विकल्प और विचार करने की शक्ति। * **बुद्धि:** निर्णय लेने और विवेक की क्षमता। * **अहंकार:** आत्म-बोध और अस्मिता। * **चेतना (चित्त):** स्मृति, ध्यान और आंतरिक ज्ञान। **4. चार बिंदु (भक्ति के चार स्तंभ)** स्वास्तिक के चारों कोनों में लगाए जाने वाले बिंदु आंतरिक समर्पण भाव को दर्शाते हैं: * **श्रद्धा:** ईश्वर और धर्म में अडिग निष्ठा। * **विश्वास:** परमात्मा की कृपा पर पूर्ण भरोसा। * **प्रेम:** बिना शर्त परमात्मा और सृष्टि से स्नेह। * **समर्पण:** कर्तापन का त्याग कर सब कुछ प्रभु चरणों में अर्पित करना। **5. दोनों ओर की रेखाएं और शब्द (ऋद्धि-सिद्धि व शुभ-लाभ)** स्वास्तिक के दोनों किनारों पर खींची जाने वाली दो-दो सीधी रेखाएं और लिखे जाने वाले शब्द: * **शुभ और लाभ:** ये भगवान गणेश के पुत्र माने जाते हैं। 'शुभ' का अर्थ है मंगल व कल्याण और 'लाभ' का अर्थ है सत्कर्मों से प्राप्त फल। * **ऋद्धि और सिद्धि:** ये भगवान गणेश की पत्नियां और शक्तियां हैं। 'ऋद्धि' वैभव और समृद्धि की प्रतीक है, जबकि 'सिद्धि' सफलता और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक है।

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