
Rama Devi Sahu
2 days ago
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 19 सितम्बर 2026* *⛅दिन - शनिवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - शरद* *⛅मास - भाद्रपद* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - अष्टमी दोपहर 03:26 तक तत्पश्चात् नवमी* *⛅नक्षत्र - मूल मध्यरात्रि 01:43 तक तत्पश्चात् पूर्वाषाढ़ा* *⛅योग - आयुष्मान् दोपहर 02:29 तक तत्पश्चात् सौभाग्य* *⛅राहुकाल - सुबह 09:18 से सुबह 10:49 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:15* *⛅सूर्यास्त - 06:27 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:40 से प्रातः 05:27 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:56 से दोपहर 12:45 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:57 से मध्यरात्रि 12:44 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - राधा अष्टमी, मासिक दुर्गा अष्टमी, ज्येष्ठ गौरी विसर्जन, महालक्ष्मी व्रत आरम्भ,* *🌥️विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है एवं नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* ✨ चिदाकाशजगदेकताप्रतिपादन सर्ग 281 📜 🔴 वशिष्ठजी बोले, हे महाबाहो, रामजी🙏! तुम मेरे परम वचन🗣️ सुनो दृढ़ अभ्यास📚 के निमित्त मैं फिर कहता हूँ | जैसे आदर्श को ज्यों ज्यों मार्जन करते हैं त्यों त्यों उज्ज्वल होता है, तैसे ही बारम्बार सुनने👂 से अभ्यास दृढ़ होता है | जितना कुछ जगत्🌍 भासता है सो सब चिदानन्दस्वरूप✨ है | भासती भी वही वस्तु है जो आगे भानरूप होती है | वह भानरूप चेतन है इससे जो पदार्थ भासते हैं सो सब चेतनरूप💡 हैं और जो भिन्न भिन्न पदार्थ द्वैत की कल्पना💭 से भासते हैं सो भी वास्तव में भानरूप चेतन हैं | 🔴 जैसे जो कुछ उच्चार करते हैं सो सब शब्द🔊 है पर शब्दरूप एक है और अर्थ से भिन्न भिन्न भासते हैं | जब अर्थ की कल्पना त्याग दीजे तब यही शब्द है और जो अर्थ कीजिये कि यह जल💧 है, यह पृथ्वी🌏 है, यह अग्नि🔥 है इनसे आदि लेकर अनेक शब्द और अर्थ होते हैं और अर्थ रहित शब्द एक ही है, तैसे ही यह सब चेतन है पर चित्त🧠 की कल्पना से भिन्न भिन्न पदार्थ भासते हैं और कुछ वस्तु नहीं और जो भासता है सो उसी का आभास है | 🔴 हे रामजी आभास भी अधिष्ठानसत्ता भासती है ज्ञान💡 में भेद है पर स्वरूप ज्ञान में भी भेद नहीं जिससे अर्थ भासते हैं | ज्ञानरूप अनुभवसत्ता है, इसमें जिस अर्थ का आभास होता है उसी को जानता है | जैसे एक ही रस्सी➰ है उसमें सर्प🐍 का भ्रम🌀 करे तो सर्प तो कुछ नहीं वह रस्सी ही है , तैसे ही अर्थ ग्रहण कीजिये तो भेद है नहीं तो ज्ञान ही है सर्व पदार्थ जो भासते हैं वे सब ज्ञानरूप ही हैं और कुछ बना नहीं | 🔴 हे रामजी! स्वप्न💤 का दृष्टान्त मैंने तुमको जताने के निमित्त कहा है, वास्तव में स्वप्ना भी कोई नहीं, अद्वैतसत्ता🕉️ ही अपने आपमें स्थित है | जैसे समुद्र🌊 सदा जलरूप है पर द्रवता से तरंग〰️ बुद्बुदे भासते हैं सो नानारूप नहीं और नाना हो भासता है, तैसे ही सर्व जगत् अनाना रूप है और नाना हो भासता है | 🔴 तुम अपने स्वप्न को विचारकर🤔 देखो कि तुम्हारा अनुभव ही नाना प्रकार हो भासता है परन्तु कुछ हुआ नहीं तैसे ही यह जाग्रत🌅 जगत् भी तुम्हारा अपना आप है और दूसरा कुछ नहीं | सदा निराकार☁️, निर्विकार और आकाशरूप आत्मसत्ता🌟 अपने आपमें स्थित है | 🔴 रामजी ने पूछा, हे भगवन्🙏! जो अद्वैतसत्ता निराकार निर्विकार और सदा अपने आपमें स्थित है तो पृथ्वी कहाँ से उपजी है जल कैसे उपजा है और अग्नि , वायु🌬️, आकाश🌌, पुण्य😇, पाप😈 इत्यादिक कल्पना चिदाकाश में कैसे उपजे हैं मेरे दृढ़बोध के निमित्त कहो? 🔴 वशिष्ठजी बोले, हे रामजी! यह तुम कहो कि स्वप्ने में पृथ्वी कहाँ से उपज आती है और जल, वायु, अग्नि, आकाश, पाप, पुण्य, देश, काल⏳, पदार्थ कहाँ से उपजते हैं? 🔴 रामजी बोले, हे मुनीश्वर🧘♂️! स्वप्ने में जो पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, देश, काल, पदार्थ भासते हैं तो सब आत्मरूप✨ होते हैं और आत्म सत्ता ही ज्यों की त्यों होती है सो तत्त्ववेत्ताओं को ज्यों की त्यों भासती है और जो असम्यक््दर्शी हैं उनको भिन्न भिन्न पदार्थ भासते हैं | भासना दोनों का तुल्य होता है परन्तु जिसकी वृत्ति यथाभूत अर्थ को ग्रहण करती है उसको ज्यों का त्यों आत्मसत्ता भासती है और जिसकी वृत्ति यथाभूत अर्थ ग्रहण नहीं करती उसको वही वस्तु और रूप हो भासती है | 🔴 हे मुनीश्वर! और जगत् कुछ बना नहीं वही आत्मसत्ता स्थित है | जब कठोररूप की संवेदन फुरती है तब पृथ्वी और पहाड़⛰️ रूप हो भासती है, जब द्रवता का स्पन्द फुरता है तब जलरूप हो भासती है और उष्णरूप की संवेदन फुरती है तब अग्नि भासती है, इसी प्रकार वायु, आकाशादिक पदार्थों में जैसे
Comments (2)

Rama Devi Sahu
Sep 19, 2026
🌸🦚 **राधे राधे** 🦚🌸 राधा-कृष्ण का प्रेम वो एहसास है, जिसे शब्दों में नहीं… सिर्फ दिल से महसूस किया जाता है। ❤️🙏 जिसके जीवन में श्री राधा-कृष्ण की कृपा हो, उसके जीवन में प्रेम, शांति और विश्वास कभी कम नहीं होता। ✨ 🦚 जय श्री कृष्ण 🌹 राधे राधे 🌹

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Sep 19, 2026
जय श्री राधे कृष्णा! आपको और आपके पूरे परिवार को श्री राधाष्टमी के पावन पर्व की अनंत शुभकामनाएं। लाडली जी की कृपा, प्रेम और आशीर्वाद आपके जीवन में सदैव सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखे। राधे-राधे! 🙏✨
