
SHREE SHARMA
349 days ago
(((( राधावल्लभ श्री हरिवंश श्री वृंदावन श्री वनचंद्र )))) . नाम के प्रभाव से धाम ही साधक के पास प्रकट होता है.. . राजस्थान के बीकानेर क्षेत्र के पास एक गांव मे एक गोपाली बाई नाम की भक्ता थी। . वह वर्ष में दो बार श्री वृंदावन में श्रीराधवल्लभ जी का दर्शन करने जाती। संतो के लिए भंडारा भी करती थी। उसकी श्री वृंदावन धाम और रज में बड़ी श्रद्धा थी। . माता पिता की वह एक ही लड़की थी। बहुत प्रयास करने पर भी उसका विवाह नही हुआ। . बाद मे माता पिता वृद्ध हो गए, बीमार रहने लगे तो उनकी सेवा मे रहने के कारण धाम नही जा पाती थी। . एक दिन उसके गुरुदेव वहां आये और उसको आज्ञा करी की तुम वृंदावन वास की ज़िद नही करना, श्री राधारानी ने जिस अवस्था मे रखा है उसमें सुख मानकर भजन करना, माता पिता को त्यागना नही। . अपने मुख से सदा "राधावल्लभ श्री हरिवंश श्री वृंदावन श्री वनचंद्र" इस का कीर्तन करती रहती थी। . कुछ वर्ष बाद माता पिता का शरीर शांत हुआ। अब वृंदावन जाने का सोचती तो स्वयं का शरीर भी कमजोर होने लगा था। आस पास के लोग उसको कभी रोटी दाल आदि दे जाते। . एक दिन उसको लगा की अब मृत्यु निकट है, वह बहुत व्याकुल होकर तीव्र गति से भजन करने लगी। अब कैसे ब्रजरज पाऊँ? अब कैसे धाम का दर्शन पाऊँ? . रुदन करती हुई पुकारने लगी "राधावल्लभ श्री हरिवंश श्री वृंदावन श्री वनचंद्र"। . उसी समय उसने देखा की वह जिस चारपाई पर पड़ी है, उसके बगल मे यमुना जी प्रकट हो गयी। सामने श्री गिरिराज जी प्रकट हो गए। . वह अनुभव कर रही थी की यमुना जी के किनारे उसकी चारपाई पड़ी है। यमुना का दिव्य नील वर्ण है, अत्यंत स्वच्छ जल है और उनके भीतर अलौकिक स्वर्ण कांति के मत्स्य, कछुए है। . गिरिराज जी स्वर्ण मयी दिखाई दिए। कुछ देर मे गायों के गले की घंटियों की आवाज आयी और श्री कृष्ण बलराम जी हजारों सुंदर गायों के साथ दिखाई दिए। . गौ माताओं के चलने से जो ब्रजरज उड़ रही थी वह उसके अंगो का स्पर्श करने लगी। भगवान की गौ चारण लीला को देखते देखते दिव्य श्री वृंदावन धाम के मध्य मे उसने प्राण त्याग किया। . आजकल कई युवक व युवतियां माता पिता को छोड़कर वृंदावन वास करना चाहते है। . कई लोग अपने माता पिता की सेवा छोड़कर तीर्थो मे निवास करने की जिद पकड़े हुए है। उन्हें इस प्रसंग से बहुत लाभ होगा ऐसी आशा करता हूं। . भगवान श्रीकृष्ण श्रीमद्भागवत मे कहते है की जो लोग अपने माता पिता की सेवा नही करते, उनका पोषण नहीं करते, वे कितने भी साधन कर ले पर नरक अवश्य जाते है। . वहां उन्हें भूखा रखा जाता है और जब वह भूख से व्याकुल होकर चिल्लाते है तो उनके अपने ही शरीर का मांस नोंच कर यमदूत उन्हें खिलाते है। . भगवान की कृपा से जिन्हें ब्रजवास मिला है वह तो है ही, पर जिन्हें अभी नही मिला है उनको भगवान ने जहां रखा है वही रहकर निष्ठा से नाम करना चाहिए। . नाम, भगवान और धाम मे कोई अंतर नही है । नाम स्वयं ही साधक के पास धाम को प्रकट कर सकता है। . श्री महाप्रभु जी को वृंदावन का प्रचंड विरह होता था परंतु माता के लिए वह जगन्नाथ पुरी मे ही रहे। . श्री मीरा जी ने भी नाम के प्रभाव से वृंदावन को मेड़ता क्षेत्र मे ही प्रकट कर लिया। ब्रज की लता पता, गोवर्धन, ब्रज के कुंड, ब्रज के वन सभी के सभी मेड़ता मे प्रकट हो गए। . श्री राधाबाबा और हनुमान प्रसाद पोद्दार जी को गोरखपुर मे रहकर धाम का नित्य अनुभव होता था। ~~~~~~~~~~~~~~~~~ ((((((( जय जय श्री राधे )))))))

Comments (4)

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩
Sep 15, 2025
शीश गंग अर्धांग पार्वती सदा विराजित कैलाशी 🕉️🚩🌹 देवों के देव हर हर महादेव मां आदिशक्ति आशीर्वाद कृपा सदेव आप और परिवार पर बना रहे ॐ नमः शिवाय 🙏🙏

Rama Devi Sahu
Sep 15, 2025
Shrimad Bhagwat Mahapuran me Uddhav kehte Hain Shree Krishna Ji... " Sakal Tirth Tho Charn, Badrika Jau Kis Karan ".

Rama Devi Sahu
Sep 15, 2025
Bahut hi Sundar Story 👌👌 Aaj kal Bhagwan ki Naam lena Bahut hi Kasta lagta...! Or Mata Pita ki Seva Chod... Kya Batau...Aap tho TV Madhyam me or Aaspaas ke Khabar Sab kuch dekh Rahe ho....!!! Jai Ho Brindavan Banke Bihari Ji ki...🙏🙏

Rama Devi Sahu
Sep 15, 2025
🙏🔱 Har Har Mahadev 🔱🙏🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️
