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9.3.2026 जीवन में सफलता असफलता तो प्रत्येक व्यक्ति को प्राप्त होती रहती है। *"प्रत्येक सफल व्यक्ति पहले असफल ही होता है।"* क्योंकि उसे कार्यक्षेत्र का अनुभव नहीं होता। धीरे-धीरे वह सीखता जाता है। अनेक बार वह प्रयोग करता है, और आरंभ में अपने क्षेत्र में असफल होता है। उस असफलता से शिक्षा प्राप्त करके फिर उत्साह से पुरुषार्थ करता है। *"ऐसे बार-बार पुरुषार्थ करने से और अन्य अपने जैसे असफल लोगों का सहयोग लेकर वह धीरे-धीरे उन्नति करता जाता है, और सफलता प्राप्त करने लगता है।"* *"जब उसको कुछ विशेष सफलता प्राप्त हो जाती है, तब वह अपने उन पूर्व सहयोगियों से, जो कि असफल रहे थे, अब उनसे दूर हटने लगता है। उनसे मिलना जुलना कम कर देता है, क्योंकि उसे डर लगता है कि "ये मेरे पूर्व सहयोगी अब मुझसे सहायता मांगेंगे।" और जो दूसरे सफल लोग उसे पहले सम्मान नहीं देते थे, अब यह सफल व्यक्ति उन लोगों के साथ मेलजोल बढ़ाता है, जो उसे पहले सहयोग नहीं देते थे, उससे दूर भागते थे। क्योंकि तब वे भी यही सोचते थे कि "यह असफल व्यक्ति हमें परेशान करेगा।" अब सफलता प्राप्त करने के बाद वे लोग भी इसको महत्व देने लगे। क्योंकि अब उन्होंने भी समझ लिया कि इसके पास भी कुछ योग्यता है, और यह अब सफल हो गया है। इस प्रकार से यह संसार में आश्चर्य की बात देखी जाती है।"* वास्तव में, *"जो व्यक्ति पुरुषार्थ करके सफल हो गया, उसे अपने पूर्व सहयोगियों से दूर नहीं भागना चाहिए, बल्कि उनका आभार मानते हुए यथायोग्य उनकी सहायता भी करनी चाहिए।" "और जो पहले से सफल लोग थे, जो इसका सहयोग नहीं करते थे, उनसे भी अधिक मेलजोल नहीं रखना चाहिए, बस काम से काम रखना चाहिए। अन्यथा अन्याय को बढ़ावा मिलेगा।"* *"अन्याय को दूर करना, और न्याय की स्थापना करना ही प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है।" "अतः अपने कर्तव्य को पहचानें और सबके साथ न्याय पूर्वक उचित व्यवहार करें। इसी से सब की उन्नति होगी, और सब का सुख बढ़ेगा, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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