
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
232 days ago
🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞 ⛅दिनांक - 10 जनवरी 2026 ⛅दिन - शनिवार ⛅विक्रम संवत् - 2082 ⛅अयन - दक्षिणायण ⛅ऋतु - शिशिर ⛅मास - माघ ⛅पक्ष - कृष्ण ⛅तिथि - सप्तमी सुबह 08:23 तक अष्टमी ⛅नक्षत्र - हस्त दोपहर 03:40 तक तत्पश्चात् चित्रा ⛅योग - अतिगण्ड शाम 04:59 तक तत्पश्चात् सुकर्मा ⛅राहुकाल - सुबह 09:52 से सुबह 11:13 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅सूर्योदय - 07:10 ⛅सूर्यास्त - 05:59 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में ⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:25 से प्रातः 06:17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:13 से दोपहर 12:56 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:08 जनवरी 11 से रात्रि 01:01 जनवरी 11 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) 🌥️व्रत पर्व विवरण - मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, कालाष्टमी 🌥️विशेष - अष्टमी को नारियल फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🔹प्राकृतिक नियमों का करें पालन, बना रहेगा स्वस्थ जीवन ( भाग २) 🔸५] बैठने – चलने का सही ढंग : गलत ढंग से बैठने, खड़े होने या चलने से हमारी कार्यक्षमता व जीवनीशक्ति की हानि होती है । अत: इस संदर्भ में कुछ बातों का ध्यान रखें : 👉 दोनों नितम्ब बैठनेवाले स्थान पर समानरूप से रखने चाहिए । 👉 रीढ़ की हड्डी अपने प्राकृतिक झुकावोंसहित सीधी रहनी चाहिए । इससे शरीर की सभी नस-नाड़ियाँ, जो शरीर के सभी भागों को शक्ति देती हैं, वे अच्छी तरह से कार्य करती है । मेरुदंड सीधा नहीं रखने से इन नाड़ियों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है । इसका बुरा प्रभाव शरीर के अन्य अंगो पर पड़ता है और वे सामान्यरूप से कार्य नहीं करते हैं । जब शरीर सीधा रखा जाता है तो छाती उभरी रहती है । इसके गोलाकार और फैले रहने से ह्रदय और फेफड़ों के के लिए पर्याप्त स्थान मिलता है, जिससे वे अपनी पूरी कार्यक्षमता से कार्य कर पाते हैं । 👉 सिर को ऐसी सीधी स्थिति में रखना चाहिए कि गर्दन के आगे और पीछे के भाग की मांसपेशियाँ दबाव या तनाव रहित रहें । ▬▬๑⁂❋⁂๑▬▬ 🚩जय श्री राम🚩 🚩धर्मो रक्षति रक्षितः 🇮🇳हिन्दू राष्ट्र भारत

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