
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
358 days ago
जब प्रभु श्रीराम ने लंका विजय के बाद विभीषण जी को लंका का राजा बनाया, तो उन्होंने यह निर्णय लेते समय मन ही मन थोड़ा संकोच किया। उन्हें यह चिंता हुई कि कहीं विभीषण ऐसा न सोचें — “प्रभु मुझे वही लंका दे रहे हैं जो भगवान शंकर ने मेरे भाई रावण को उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर प्रदान की थी।” प्रभु राम का यह विचार उनकी अद्वितीय नम्रता और मर्यादा का उदाहरण है। वे जानते थे कि यह राज्य किसी का नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा का प्रतीक है — और वे स्वयं केवल धर्म की स्थापना का कार्य कर रहे हैं। 🌺 यही तो श्रीराम का आदर्श है — विजय के बाद भी विनम्रता, दान के बाद भी दीनता, और सत्ता के बाद भी समर्पण। 🚩 जय श्री राम 🚩

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