
SHREE SHARMA
448 days ago
#नवग्रहस्तोत्र (महर्षि वेदव्यास कृत) नवग्रहमंत्र ऊँ ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु।। 1 माला नित्य करें। निम्नलिखित स्तोत्र को रोज पढ़ने से कुंडली में ग्रह शांत बनें रहते हैं और आपके जीवन में किसी भी तरह की दिक्कते पैदा नहीं करते हैं। ।।ध्यान।। आदित्याय च सोमाय मंगलाय बुधाय च। गुरु शुक्र शनिभ्यच राहवे केतवे नम:। ।।नवग्रह् स्तोत्र।। जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महद्युतिं तमोरिसर्व पापघ्नं प्रणतोस्मि दिवाकरं (रवि) दधिशंख तुषाराभं क्षीरोदार्णव संभवं नमामि शशिनं सोंमं शंभोर्मुकुट भूषणं (चंद्र) धरणीगर्भ संभूतं विद्युत्कांतीं समप्रभं कुमारं शक्तिहस्तंच मंगलं प्रणमाम्यहं (मंगळ) प्रियंगुकलिका शामं रूपेणा प्रतिमं बुधं सौम्यं सौम्य गुणपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहं (बुध) देवानांच ऋषिणांच गुरुंकांचन सन्निभं बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिं (गुरु) हिमकुंद मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरूं सर्वशास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहं (शुक्र) नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजं छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्वरं (शनि) अर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्य विमर्दनं सिंहिका गर्भसंभूतं तं राहूं प्रणमाम्यहं (राहू) पलाशपुष्प संकाशं तारका ग्रह मस्तकं रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहं (केतु) ।।फलश्रुति।। इति व्यासमुखोदगीतं य पठेत सुसमाहितं। दिवावा यदि वारात्रौ विघ्नशांतिर्भविष्यति।। नरनारी,नृपाणांच भवेत् दु:स्वप्ननाशनं। ऐश्वर्यंमतुलं तेषां आरोग्यं पुष्टिवर्धनं।। ग्रहनक्षत्रजा पीडास्तस्कराग्नि समुद्भवा। ता: सर्वा: प्रशमं यान्ति व्यासो ब्रुतेनसंशय:।। इति श्री व्यासविरचित आदित्यादि नवग्रह स्तोत्रं संपूर्णं। ............................. .................... शरीर के किस अंग से जुड़ा है कौन सा ग्रह- 1-सूर्य ग्रह की खराब दिशा चलने से आंखों से संबंधित रोग हो जाते हैं। क्योंकि ये ग्रह आंखों से जुड़ा होता है। 2-चंद्रमा को मन का ग्रह माना जाता है और इसकी बुरी दिशा होने पर मन अशांत रहता है। 3-मंगल ग्रह को रक्त संचार माना जाता है और जब किसी जातक की कुंडली में ये ग्रह गलत घर में हो, तो जातक को रक्त यानी खून से संबंधित रोग लग जाते हैं। 4-बुध ग्रह हृदय से जुड़ा होता है और कुंडली में ये ग्रह भारी होने पर इसका असर दिल पर पड़ता है। 5-बृहस्पति ग्रह अगर कुंडली में गलत स्थान पर हो, तो जातक की बुद्धि पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। 6-शुक्र ग्रह का नाता रस से होता है और शुक्र ग्रह के कुंडली में अशांत होने पर शरीर पर नकारात्मक असर पड़ता है। 7-शनि, राहू और केतु ये तीनों ग्रह उदर के स्वामी होते हैं और इनकी वजह से पेट से जुड़ी तकलीफें होती हैं। ~~~~````~~~~`````~~~~`````~~~~~~
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