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_कलियुग की सच्चाई_ — ये चार लाइनें आज के दौर का आईना हैं। *घर बड़े हो गए, पर दिल छोटे हो गए।* पहले 2 कमरे में 10 लोग खुश रहते थे। अब 10 कमरे में 2 लोग भी अकेले लगते हैं। *रिश्ते ऑनलाइन हो गए, पर अपने ऑफलाइन हो गए।* WhatsApp पर 500 कॉन्टैक्ट, पर शाम को चाय पीने घर कोई नहीं आता। *मोबाइल हाथों में आ गए, पर संस्कार हाथ से निकल गए।* बच्चे फोन चलाना जन्म से जानते हैं, पर पैर छूना भूल गए। *भोजन प्लेटों में सज गया, पर माँ के हाथों का स्वाद खो गया।* Zomato से 30 मिनट में खाना आ जाता है, पर माँ के हाथ की रोटी का वो प्यार कहाँ। कड़वा है, पर सच है। कलियुग मतलब सुविधा तो बढ़ी, पर सुकून कम हो गया।

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