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*पांडवों की राजधानी - इंद्रप्रस्थ नगरी* इंद्रप्रस्थ महाभारत कालीन अतिप्राचीन नगरी है, जो पांडवों की राजधानी हुआ करती थी. महाभारत महाकाव्य में इस नगरी के निर्माण एवं विस्तार का विस्तृत उल्लेख है. धृतराष्ट्र की सलाह पर युधिष्ठिर ने पार्थ श्रीकृष्ण के सहयोग से इंद्रप्रस्थ नगरी की स्थापना की थी, जिसके वास्तुकला की रचना भगवान विश्वकर्मा ने की थी. सागर जैसी चौड़ी खाई से घिरा, स्वर्ग गगनचुम्बी चारदीवारी से घिरा एवं चंद्रमा या सूखे मेघों जैसा श्वेत यह नगर अद्भुत, अद्वितीय एवं अकल्पनीय लगता था. भीष्म पितामह और धृतराष्ट्र के अपने प्रति दर्शित नैतिक व्यवहार के परिणामस्वरूप पांडवों ने खांडवप्रस्थ को इंद्रप्रस्थ में परिवर्तित कर दिया था. भव्य महलों, अट्टालिकाओं और स्थापत्य की उन्नत कला से सुसज्जित यह नगरी इंद्र की नगरी की भांति दिखती थी, इस कारण ही इसे इंद्रप्रस्थ नाम दिया गया था. *मेरी संस्कृति...मेरा देश...मेरा अभिमान 🚩*

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