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माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति और महेश नवमी के महत्व **माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति की पौराणिक कथा** * **क्षत्रिय मूल:** पौराणिक कथाओं के अनुसार, माहेश्वरी समाज के पूर्वज मूल रूप से क्षत्रिय थे. * **शाप का कारण:** एक दिन राजा खड्गलसेन शिकार पर गए और वहाँ ऋषियों के यज्ञ में बाधा उत्पन्न हो गई. इससे क्रोधित होकर ऋषियों ने राजा और उनके 72 सैनिकों को पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया. * **शिव की तपस्या:** राजा और सैनिकों की पत्नियों ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की. * **श्राप से मुक्ति:** भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें श्राप से मुक्त किया और उन्हें 'अहिंसक' बनने तथा मांसाहार का त्याग करने का निर्देश दिया. * **नया नाम और मार्ग:** भगवान शिव ने उन्हें क्षत्रिय से 'माहेश्वरी' कहलाने और शस्त्र छोड़कर व्यापार के माध्यम से समाज की सेवा करने का मार्ग दिखाया. **महेश नवमी का महत्व** * **महेश नवमी:** यह समाज ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को 'महेश नवमी' के रूप में मनाता है, क्योंकि इसी दिन उनके पूर्वजों ने क्षत्रिय धर्म छोड़कर व्यापारी बनना स्वीकार किया था.

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