
SHREE SHARMA
13 days ago
🍁 पंचक-विवरण 🍁 🔸️नक्षत्रानुसार पंचक की परिभाषा :--- सत्ताईस नक्षत्रों में से अन्तिम पाँच घनिष्ठा, शतभिषा (शततारा), पूर्वाभाद्रपदा, उत्तराभाद्रपदा तथा रेवती जब क्रमशः आते हैं, तब सम्पूर्ण अवधि को पंचक कहा जाता है। 🔸️क्या पंचक में शुभ कार्य वर्जित हैं❓️ नहीं — पंचक के समय पाया-भरण (नवजात संस्कार), गृहप्रवेश, विवाह, व्यापार-आरम्भ आदि सभी शुभ कार्य किये जा सकते हैं। 🔹️पंचक के पाँच भेद :--- १. रोग-पंचक — रविवार से प्रारम्भ; अशुभ फलदायक। २. राज-पंचक — सोमवार अथवा बुधवार से प्रारम्भ; शुभ। फलदायक। ३. अग्नि-पंचक — मंगलवार अथवा गुरुवार से प्रारम्भ; मिश्रित फल (शुभ व अशुभ दोनों)। ४. चौर-पंचक — शुक्रवार से प्रारम्भ; अशुभ फलदायक, 🚩 दक्षिण दिशा की यात्रा वर्जित। ५. मृत्यु-पंचक — शनिवार से प्रारम्भ; अशुभ फलदायक। ☠️ मृत्यु-पंचक सम्बन्धी विशेष विचार :--- यदि पंचक में मृत्यु घटे तो तीन स्थितियाँ सम्भव :--- १️⃣ मृत्यु पंचक से पहले, परंतु दाह पंचक में — दाह से पूर्व आटे, चावल और कुश से पाँच पुतले बनाकर उन्हें अग्नि में दग्ध करना, तत्पश्चात पंचक-शान्ति। २️⃣ मृत्यु और दाह, दोनों पंचक में — उपर्युक्त पाँच पुतले दग्ध करने के साथ आपमृत्यु-दोष निवारण शान्ति तथा नारायण-बली अनिवार्य। ३️⃣ मृत्यु पंचक में, दाह पंचक के बाद — केवल आपमृत्यु-दोष निवारण शान्ति व नारायण-बली आवश्यक; पुतला-दाह नहीं। 🚫 पंचक में वर्जित कार्य 👉 लकड़ी संग्रह (आधुनिक काल में गैस-सिलेंडर, चूल्हा आदि की खरीद) 👉 नया पलंग, सोफा, सैट्टी आदि बनवाना या खरीदना 👉 दक्षिण दिशा की यात्रा 👉 छत या स्लैब का निर्माण शव-दाह (ऐसा करने से परिवार/समाज में पाँच व्यक्तियों की मृत्यु आशंका) अस्थि-संचय ✅ पंचक में किये जाने योग्य कार्य ¤ पाया-भरण ¤ गृहप्रवेश ¤ विवाह ¤ व्यापार-आरम्भ अन्य सभी शुभ कार्य 《 पंचक काल में अशुभ कार्यों से परहेज़ आवश्यक है, किन्तु शुभ कार्यों में कोई बाधा नहीं। यदि मृत्यु पंचक में घटे तो समाज-परम्परा एवं पण्डित की सलाह के अनुसार आवश्यक विधान करना अनिवार्य है। 》

Comments (1)

बरखा शर्मा
Aug 11, 2026
har har mahadev ji🙏🌷🌷