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30.6.2026 यूं तो प्रत्येक व्यक्ति चाहता है, कि *"मैं अपने जीवन में सफल हो जाऊं।"* बहुत से लोग सफल होने के लिए पुरुषार्थ भी करते हैं। बहुत अच्छी बात है, *"सबको पुरुषार्थ करना चाहिए।"* परंतु पुरुषार्थ करने वालों में से कुछ लोग धैर्यवान होते हैं, और कुछ लोग बहुत उतावले =(जल्दबाजी करने वाले). बहुत उतावला होना अच्छी बात नहीं है। एक पुरानी कहावत है, *"सहज पके सो मीठा होय."* अर्थात *"पहले लोग पतीली में दाल सब्जी बनाते थे, वह धीरे-धीरे पकती थी, और अच्छी मीठी होती थी। स्वादिष्ट होती थी।"* अब कुकर में बनाते हैं। इससे समय तो बच जाता है, दाल सब्जी जल्दी बन जाती है। *"परंतु स्वाद वैसा नहीं होता, स्वाद में अंतर आ जाता है। इसलिए धीरे-धीरे पकाना ही अच्छा है।"* इसी प्रकार से धीरे-धीरे उन्नति करना अच्छा है। यह बात आप कछुए से सीख सकते हैं। *"कछुआ बहुत तेज नहीं भाग सकता। वह धीरे-धीरे चलता है। जीवन में सफल होने के लिए भी तेंदुए की तरह तेज भागने की आवश्यकता नहीं है।" "कछुए की तरह भी यदि आप धीरे-धीरे लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे, तो सुरक्षित रूप से लक्ष्य पर पहुंचेंगे। शांति से पहुंचेंगे। सही दिशा में चलते हुए सही लक्ष्य पर पहुंचेंगे।" "तो बड़ी आवश्यकता इस बात की है, कि आपके चलने की दिशा सही हो, और आपका उद्देश्य सही हो, फिर गति की चिंता न करें।"* *"यदि आप सही दिशा में और सही लक्ष्य की ओर चल रहे हैं, चाहे धीरे-धीरे ही सही, तो किसी न किसी दिन आप अपने लक्ष्य पर पहुंच अवश्य जाएंगे।" "लक्ष्य को छोड़कर इधर-उधर न भटकें। चालाक एवं धोखेबाज लोगों की बातों में न आएं। आप अवश्य ही लक्ष्य की प्राप्ति करेंगे, और जीवन में सुखी रहेंगे।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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