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भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक चलने वाले इन 16 दिनों को **पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष)** कहा जाता है। यह समय पूर्वजों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और तर्पण व्यक्त करने का पावन अवसर होता है। शास्त्रों के अनुसार इन 16 दिनों का क्रम इस प्रकार है: 1. **पूर्णिमा श्राद्ध** (भाद्रपद पूर्णिमा - पितृपक्ष का आरंभ) 2. **प्रतिपदा श्राद्ध** (नाना-नानी श्राद्ध) 3. **द्वितीया श्राद्ध** 4. **तृतीया श्राद्ध** 5. **चतुर्थी श्राद्ध** 6. **पंचमी श्राद्ध** 7. **षष्ठी श्राद्ध** 8. **सप्तमी श्राद्ध** 9. **अष्टमी श्राद्ध** 10. **नवमी श्राद्ध** (मातृ नवमी - माता व परिवार की दिवंगत स्त्रियों के निमित्त) 11. **दशमी श्राद्ध** 12. **एकादशी श्राद्ध** 13. **द्वादशी श्राद्ध** (संन्यासी श्राद्ध) 14. **त्रयोदशी श्राद्ध** (काकबली / मघा श्राद्ध) 15. **चतुर्दशी श्राद्ध** (अकाल मृत्यु या दुर्घटना में दिवंगत हुए परिजनों के निमित्त) 16. **सर्वपितृ अमावस्या** (अज्ञात या भूली-बिसरी सभी तिथियों के पितरों के निमित्त पूर्ण आहुति) > "ॐ पितृभ्यो नमः" — पूर्वजों का आशीर्वाद परिवार पर सदैव सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखे। 💐🙏🏻 >

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