
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
212 days ago
30.1.2026 प्रत्येक व्यक्ति में पूर्व जन्मों के संस्कार होते हैं। कुछ अच्छे भी होते हैं, और कुछ बुरे भी। *"क्योंकि अभी उसके पूरे संस्कार अच्छे नहीं हो पाए, इसीलिए उसका संसार में जन्म होता है।"* *"यदि सारे संस्कार अच्छे हो गए होते, तो उसकी अविद्या नष्ट हो जाती, और उसका मोक्ष हो जाता।"* क्योंकि उसका जन्म हुआ है, इसका अर्थ है कि *"उसमें अभी कुछ अविद्या बची हुई है। उसी अविद्या का नाश करने के लिए ही ईश्वर ने उसे यहां संसार में जन्म दिया है, ताकि वह अपनी अविद्या का नष्ट कर ले। अपने पिछले कर्मों का फल भोग ले, और आगे अच्छे कर्म करके मोक्ष भी प्राप्त कर ले।"* अब इस विषय में विचार यह करना चाहिए, कि *"प्रत्येक व्यक्ति में जो अच्छे बुरे संस्कार होते हैं। यदि वह उनमें से अपने अच्छे संस्कारों को प्रोत्साहन देगा, तो अच्छे काम करेगा। और यदि बुरे संस्कारों को प्रोत्साहन देगा, तो बुरे काम करेगा।"* अब यह प्रत्येक व्यक्ति की अपनी इच्छा और बुद्धि पर निर्भर करता है, कि वह अच्छाई को प्रोत्साहन दे, या बुराई को। *"जिसको भी वह बार-बार प्रोत्साहन देगा, उसके वही संस्कार और वैसे ही कर्म आगे बढ़ते जाएंगे।"* *"अतः बुराई से बचें और अच्छाई को सदा प्रोत्साहित करें। जिससे आप भविष्य में अच्छे कर्म करते हुए सदा सुखी रहें, और धीरे-धीरे अपनी अविद्या का नाश करके मोक्ष को भी प्राप्त कर सकें।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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