
SHREE SHARMA
352 days ago
शुद्ध विचारों का महत्त्व ,,,,,,,,,,,,,, ( विचार ही हमारी पूंजी है धन नहीं क्योंकि विचार ही हमारा आचरण (कर्म ) बनते है और हमारे कर्म ही परलोक में लोक ( तीन लोक है == देवलोक, मृत्यु लोक एवं नरक ) एवं योनि ( तीन योनि है - देव ,मानव एवं असुर यानि तामसिक योनि ) का निर्धारण करते है ! धन तो जीवन जीने का साधन मात्र है ! अतः " शुद्ध विचार " ही आपको स्वर्ग एवं मोक्ष की सीढियाँ चढ़ा सकते है यानि आपकी पसंद का लोक निर्धारित करवा सकते है ! ) पवित्र गीता के १४वे अध्याय में पढ़िए। ... ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः । जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः ॥ (१८) भावार्थ : सतोगुण में स्थित जीव स्वर्ग के उच्च लोकों को जाता हैं, रजोगुण में स्थित जीव मध्य में पृथ्वी-लोक में ही रह जाते हैं और तमोगुण में स्थित जीव पशु आदि नीच योनियों में नरक को जाते हैं। (१८)) भगवान मूर्तियों में नहीं है.आपकी अनुभूति (विचारों ) आपका इश्वर है.आत्मा आपका मंदिर है. चाणक्य : God is not present in idols. Your feelings (emotions ) are your god. The soul is your temple. CHANKYA....... शास्त्रों के वचन। ............ न काष्ठे विद्यते देवे न शिलाया कवचम् ! भावे ही विद्यते देवस्तम्मादभाव समाचरेत !!! देवता न तो लकड़ी में है और न ही पत्थर की शिला में रहता है ! वह तो प्राणी के .............." भाव"……… में विराजमान रहता है ! इसलिए सद्भाव से युक्त श्रद्धा एवं भक्ति का सम्यक आचरण करें ! i ! ............हमारे ऋषियों एवं मनीषियों ने धर्म के मूलभूत सिद्धांतों एवं सुन्दर विचारधाराओं को यम एवं नियम में प्रतिपादित किया है ! अतः सत्य ,अहिंसा ,त्याग,दया ,अस्तेय ,अपरिग्रह ,क्षमा ,तप एवं न्याय जैसे विचारों को अपने जीवन में स्थापित करें एवं दूसरों को इसकी शिक्षा एवं प्रेरणा दें ! आपके शुद्ध विचारों में ईश्वर का वास होने से हर प्रकार की सिद्धियाँ ( सफलताएं ) , निधियाँ एवं ईश्वर प्राप्ति सहज सुलभ हो जायेगी ! विशेष ,,,,, आहार से मनोवृतियों का निर्माण होता है अतः शुद्ध मन के लिए पंचामृत ( यानि पांच अमृत ---गाय का दूध ,दही ,घृत ,शहद एवं गन्ना ) को आहार के रूप में ग्रहण करे ! इसके अतिरिक्त ऋतू फलों एवं सूखे मेवों को खाये ! तामसिक आहार से दूरी बनाये ! यही आहार आपकी मृत्यु के उपरांत परलोक में आपके लिए योनि एवं लोक का निर्धारण करेगा ! अतः गौमाता की सेवा करें ! हमेशा ध्यान रखे प्रभु ने सृष्टि को त्रिगुणात्मक बनाया है ( सत्व ,रज एवं तम ) और योनिया भी तीन है ( असुर योनि , देव योनि एवं मनुष्य योनि ) अतः आपकी मानसिक स्थिति यानि आपकी मनोवृतिया ही आपको परलोक में योनि का निर्धारण करेंगी ! तामसिक आहार आपको ८४ लाख योनियों में भटकने एवं दारुणं दुःख भोगने को विवश कर देगा ! ,,,,,,,,,,,,परलोक में योनि एवं लोक के निर्धारण से सम्बंधित ईश्वरीय ज्ञान को प्राप्त करने के लिए पवित्र ग्रन्थ गीता को पढ़े एवं " त्रिगुण " के गूढ़ रहस्य को तीनो योनियों में विचरण करने वाले प्रीणियों की मानसिक अवस्था से जोड़कर देखे एवं समझे तभी आप समझ पाएंगे की परलोक में योनियों का निर्धारण कैसे होता है ! अंत में कहूंगा की " शुद्ध विचार " ही आपको स्वर्ग एवं मोक्ष की सीढियाँ चढ़ा सकते है यानि आपकी पसंद का लोक निर्धारित करवा सकते है ! अपने आप को "ब्रह्मज्ञानी " बनाने का प्रयास अवश्य करे ! प्रभु आपको सफलता अवश्य देंगे ! विशेष --- मनुष्य योनि में रहते हुए "परलोक में शांति * एवं * परलोक में योनि का निर्धारण" पर विचार अवश्य करें ! सनातन धर्म में इस विषय का ज्ञान अनेक धर्म ग्रंथों में बिखरा पड़ा है ! आवश्यकता है उसको समझने की "इच्छाशक्ति " की ! अपने आप को ब्राह्मण ( ब्राह्मण एक वर्ण है , यहाँ ब्राह्मण जाति का सन्दर्भ ना ले ) बनाने के लिए अपना बौद्धिक स्तर , शैक्षणिक स्तर को बढ़ाये, ब्रह्म को धारण करे एवं परोपकार की भावना को अपने अंदर पोषित करे साथ ही उचित अनुचित एवं नैतिक अनैतिक के भेद को समझकर आचरण करे,,,,,,,,,,, ,,,,,,,,,,,,और बदले में आप पाएंगे अनेक जन्मों में दुर्लभ मनुष्य योनि और वो भी सभी सुख सुविधाओं के साथ जबकि तामसिक आहार से तामसिक योनि यानि पशु ,कीड़े मकोड़े सरि सर्प की योनि में जन्म जहाँ दुःख ही दुःख है ! ******इच्छा आपकी अपनी ******

Comments (6)

Rama Devi Sahu
Sep 13, 2025
Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🙏 Prabhu Shri Ram Ji ki Aasirbad Aap pr Sadeib Bani Rahe 🙏 Aap ka Din Mangal hi Mangal Ho 🌹❤️🌹

Shri om Sharma
Sep 13, 2025
सुप्रभातम जी 🌅 जय श्री राम जी 🙏🙏 जय हनुमान जी 🙏🙏

Sunil kumar Saini..
Sep 12, 2025
jai Siya ram 🙏
