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निर्जला एकादशी के दिन जल का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है, विशेष रूप से भीषण गर्मी के समय में। इस दिन मिट्टी के मटके का दान करना 'सर्वश्रेष्ठ दान' की श्रेणी में आता है। मिट्टी के मटके का दान करने की विधि और कुछ महत्वपूर्ण बातें नीचे दी गई हैं: ### 1. दान की सही विधि * **मटके की तैयारी:** दान करने से पहले मटके को अच्छी तरह साफ कर लें। यदि संभव हो, तो उस पर चंदन से तिलक लगाएं या स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। * **जल भरना:** मटके को शुद्ध और मीठे जल से पूरा भरें। जल में गंगाजल की कुछ बूंदें डालना अत्यंत शुभ माना जाता है। * **सजावट:** मटके के मुख को किसी साफ और नए सूती कपड़े से ढकें। आप मटके के ऊपर एक ढक्कन रखकर उसके ऊपर चीनी, शर्बत या कोई फल (जैसे खरबूजा या आम) भी रख सकते हैं, जिससे दान की पूर्णता मानी जाती है। * **दान का संकल्प:** मटके को किसी प्यासे व्यक्ति, किसी मंदिर, या किसी सार्वजनिक प्याऊ (जल स्थान) पर रखते समय मन में प्रार्थना करें कि "यह जल दान मैं भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए और प्यासों की तृप्ति के लिए कर रहा/रही हूँ।" ### 2. मटका दान करते समय ध्यान रखने योग्य बातें * **स्थान का चुनाव:** ऐसे स्थान का चयन करें जहाँ राहगीरों को इसकी अधिक आवश्यकता हो। बस स्टैंड, अस्पताल के पास, या किसी छायादार पेड़ के नीचे मटका रखना बहुत लाभकारी होता है। * **शुद्धता:** सुनिश्चित करें कि मटका नई मिट्टी का हो और जल शीतल और स्वच्छ हो। * **पात्र का भाव:** दान सदैव निस्वार्थ भाव से करें। मटका दान करते समय मन में किसी प्रकार का अहंकार न रखें, बल्कि इस भाव को रखें कि आप किसी की प्यास बुझाने का माध्यम बन रहे हैं। ### 3. निर्जला एकादशी का महत्व निर्जला एकादशी को 'भीमसेनी एकादशी' भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन जल का दान करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। गर्मी के इस मौसम में एक मटका दान करना न केवल धार्मिक दृष्टि से उत्तम है, बल्कि यह एक श्रेष्ठ मानवीय कार्य भी है। > **विशेष सुझाव:** यदि आप मटके के साथ एक गिलास या लोटा भी दान में देते हैं, तो यह जल पीने वाले की सुविधा को और बढ़ा देता है, जिसे बहुत उत्तम माना जाता है। >

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