
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
243 days ago
वक़्त ने समझाया बहुत, मगर दिल ने मानना छोड़ दिया, जो ज़ख़्म तुम दे गए, उसे भरने का हुनर किसी दुआ में नहीं था। हम हँसते रहे महफ़िलों में, लोगों ने समझा सब ठीक है, किसी ने ये नहीं पूछा कि आँखों की ख़ामोशी इतनी भारी क्यों है। तुम कहते थे— “सब ठीक हो जाएगा” मगरकुछ दर्द ठीक होने के लिए नहीं होते, वो बस इंसान को बदल देते हैं। अब इलाज़ की ख़्वाहिश भी नहीं, बस इतना सा सुकून चाहिए— कि जो टूट गया है अंदर, वो रोज़ आवाज़ न करे
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