
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
144 days ago
आर्चर फिश (Archerfish) की शिकार करने की तकनीक प्रकृति का एक अद्भुत चमत्कार है। यह मछली पानी के भीतर रहकर हवा में उड़ रहे या पत्तों पर बैठे कीड़ों को गिराने के लिए **'वॉटर गन'** (Water Gun) का इस्तेमाल करती है। यहाँ बताया गया है कि यह प्रक्रिया कैसे काम करती है: ### 1. शरीर की बनावट आर्चर फिश के मुँह के ऊपरी हिस्से (तालू) में एक संकरी नाली होती है। जब यह अपनी जीभ को इस नाली के खिलाफ दबाती है, तो यह बंदूक की नली की तरह एक पाइप बना देती है। ### 2. पानी का दबाव जब उसे कोई कीड़ा नजर आता है, तो वह अपने गलफड़ों (Gill covers) को तेजी से सिकोड़ती है। इससे पानी पर भारी दबाव बनता है और पानी एक पतली लेकिन बेहद शक्तिशाली धार के रूप में मुँह से बाहर निकलता है। ### 3. अचूक निशाना * **दूरी:** यह मछली 1.5 से 2 मीटर की ऊँचाई तक सटीक निशाना लगा सकती है। * **प्रकाश का अपवर्तन (Refraction):** पानी के भीतर से बाहर की चीज़ों को देखने पर उनकी स्थिति थोड़ी अलग दिखाई देती है (जैसे पानी में डूबी पेंसिल टेढ़ी दिखती है)। आर्चर फिश को जन्मजात यह समझ होती है कि उसे किस कोण (Angle) पर थूकना है ताकि पानी सीधे कीड़े को लगे। ### 4. प्रहार की ताकत इसकी पानी की धार इतनी तेज़ होती है कि वह कीड़े को टहनी से नीचे गिरा देती है। जैसे ही कीड़ा पानी की सतह पर गिरता है, मछली उसे तुरंत निगल लेती है। दिलचस्प बात यह है कि आर्चर फिश न केवल पानी की धार छोड़ती है, बल्कि वह पानी की बूंदों के अंत में एक बड़ी बूंद (slug) बनाती है जो कीड़े से टकराते समय सबसे ज्यादा प्रभाव डालती है।
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