
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
150 days ago
13.5.2026 दिन में प्रकाश होता है, और रात्रि में अंधकार। न तो 24 घंटे प्रकाश रहता है, और न ही 24 घंटे अंधकार रहता है। कहने का सार यह हुआ कि *"कभी प्रकाश होता है, कभी अंधकार होता है। संसार में प्रकाश और अंधकार दोनों बारी-बारी से आते रहते हैं।"* इसी प्रकार से कोई भी व्यक्ति न तो सदा सुखी रहता है, और न ही सदा दुखी। *"संसार में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है, जो पूरा सुखी हो, अथवा पूरा दुखी हो। अर्थात जीवन में भी सुख और दुख दोनों बारी-बारी से आते रहते हैं।"* जब जीवन में सुख आता है, उसे तो आप खुश होकर स्वीकार कर लेते हैं। *"परंतु जब दुख आता है, तब आप उसे स्वीकार नहीं करते। बस इसी कमी को दूर करना है।"* *"तो जैसे आप सुख को स्वीकार करते हैं, ऐसे ही जब दुख आए, तो उसे भी प्रेम से स्वीकार करें। इसी का नाम ढंग से जीवन जीना कहलाता है। यदि आप ऐसा करेंगे, तो दुख आने पर भी आपको जीवन जीना सरल लगेगा। अन्यथा जीवन जीना कठिन लगेगा।"* *"अतः सुख और दुख दोनों को प्रेम पूर्वक स्वीकार करें, और सही ढंग से जीवन जिएं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।"*

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