
SHREE SHARMA
117 days ago
हिंदू वर्ष का तीसरा महीना ज्येष्ठ होता है और इस महीने में आने वाले मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार अगर बुढ़वा मंगल के दिन हनुमानजी की पूजा की जाए तो विशेष फलों की प्राप्ति भक्तों को होती है। बुढ़वा मंगल को इतना खास क्यों माना जाता है, इससे जुड़ा इतिहास क्या है आइए इस बारे में में विस्तार से जानते हैं। इस दिन होती है हनुमान जी के वृद्ध रूप की पूजा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ माह के मंगलवार के दिन हनुमान जी के वृद्ध रूप की पूजा की जाती है इसलिए इस महीने में पड़ने वाले मंगलवार को बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास के मंगलवारीय व्रत और पूजन का विशेष फल मिलता है। इसे बुढ़वा मंगल इसलिए कहा जाता है क्योंकि: 1. हनुमान जी और भीम की भेंट: माना जाता है कि इसी दिन द्वापर युग में भीम का अहंकार चूर करने के लिए हनुमान जी ने एक वृद्ध वानर का रूप धरा था। 'वृद्ध' होने के कारण ही इसे 'बुधवा मंगल' कहा जाता है। 2. श्री राम से मिलन: एक अन्य मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगल के दिन ही हनुमान जी की भेंट पहली बार भगवान श्री राम से हुई थी। 3. कल्याणकारी फल:भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और भंडारे (छबील) का आयोजन करते हैं। माना जाता है कि इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से मंगल दोष दूर होता है और जीवन के सभी कष्ट मिट जाते हैं। बुढ़वा मंगल की पौराणिक कथा भीम का अहंकार और वृद्ध वानर पांडव जब वनवास में थे, तब भीम को अपनी शारीरिक शक्ति पर बहुत गर्व हो गया था। हनुमान जी (जो भीम के धर्म-भाई भी हैं) ने भीम का अहंकार नष्ट करने की योजना बनाई। हनुमान जी ने एक अत्यंत वृद्ध वानर का रूप धारण किया और वन के रास्ते में अपनी पूंछ फैलाकर लेट गए। जब भीम उस मार्ग से गुजरे, तो उन्होंने वृद्ध वानर को पूंछ हटाने के लिए कहा। वृद्ध वानर (हनुमान जी) ने अत्यंत दुर्बल स्वर में कहा— "हे वीर! मैं बहुत वृद्ध और बीमार हूँ, मुझमें हिलने की शक्ति नहीं है। कृपया आप स्वयं ही मेरी पूंछ हटाकर आगे निकल जाएं।" भीम ने गर्व के साथ अपनी बाईं हथेली से पूंछ हटाने की कोशिश की, लेकिन पूंछ टस से मस नहीं हुई। भीम ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी, दोनों हाथों का प्रयोग किया, लेकिन वह वानर की पूंछ को एक इंच भी नहीं हिला सके। भीम को आभास हो गया कि यह कोई साधारण वानर नहीं है। उन्होंने तुरंत क्षमा मांगी और उनके वास्तविक स्वरूप के दर्शन की प्रार्थना की। तब हनुमान जी ने अपने विशाल रूप में प्रकट होकर भीम को दर्शन दिए और बताया कि शक्ति का अहंकार पतन का कारण बनता है। हनुमान जी ने जिस दिन भीम को वृद्ध रूप में दर्शन देकर उनका उद्धार किया, वह ज्येष्ठ मास का मंगलवार ही था। इसीलिए इसे बुढ़वा मंगल के रूप में पूजा जाता है। पूजा विधि के मुख्य बिंदु चोला चढ़ाना: हनुमान जी को सिंदूर और चमेली के तेल का चोला चढ़ाया जाता है। सुंदरकांड का पाठ: इस दिन सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भंडारा: इस दिन गुड़, पूड़ी और हलवे का प्रसाद बांटने की विशेष परंपरा है। लाल रंग: पूजा में लाल फूल और लाल वस्त्रों का प्रयोग किया जाता है।

Comments (2)

SHREE SHARMA
May 5, 2026
धन्यवाद

बरखा शर्मा
May 5, 2026
🌺🌻🌺Jay Shree Ram🙏 Good Morning Have A Nice Day 🌻🌺🌻🌺
