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SHREE SHARMA

360 days ago

शुक की मुक्ति दूत का कार्य होता है - अपनी स्वामी को सही जानकारी एवं उचित सलाह देना , ताकि अपने स्वामी का किसी भी प्रकार का अहित न हो। इस कसौटी पर शुक एक दूत के रूप में खरा उतरता है एवं अपने स्वामी रावण को कहता है कि हे नाथ ! क्रोध छोड़कर मेरा वचन सुनिए और श्रीराम जी से वैर (शत्रुता) त्याग दीजिए। श्री रघुनाथ जी को जानकी जी सौंप दीजिए। अपने शुभचिंतक दूत शुक की बात सुनकर रावण ने क्या किया ? इस पर तुलसीदास जी लिखते हैं - जब तेहिं कहा देन बैदेही। चरन प्रहार कीन्ह सठ तेही।। जब उसने (शुक ने) जानकी जी को वापस देने के लिए कहा , तब दुष्ट रावण ने उसको लात मारी। तब वह (शुक) वहीं चला गया , जहां कृपासागर श्री रघुनाथ जी थे। करि प्रनामु निज कथा सुनाई। राम कृपां आपनि गति पाई।। (प्रभु श्री राम को ) प्रणाम करके उसने अपनी कथा सुनाइ और श्री राम जी की कृपा से अपनी गति (मुनि का स्वरूप) पाई। शिव जी कहते हैं - रिषि अगस्ति की साप भवानी। राछस भयउ रहा मुनि ग्यानी।। हे भवानी ! वह ज्ञानी मुनि था , अगस्त्य ऋषि के शाप से राक्षस हो गया था। ऋषि अगस्त्य के शाप से मुनि शुक के राक्षस बनने की कथा का वर्णन अध्यात्म रामायण में इस प्रकार दिया गया है - शुकोऽपि ब्राह्मण: पूर्वं ब्रह्मिष्ठो ब्रह्मवित्तम:। पूर्व जन्म में शुक एक वेदज्ञ और ब्रह्मवेत्ता ब्राह्मण था। वह देवताओं की वृद्धि और दैत्यों के नाश के लिए यज्ञ किया करता था। इससे वज्रदंष्ट्र नामक एक दैत्य शुक से बदला लेने के लिए अवसर देखने लगा। एक बार महर्षि अगस्त्य मुनि शुक के आश्रम में पधारे। भोजन करने के पहले ऋषि अगस्त्य स्नान करने के लिए गए। तभी उस राक्षस ने अगस्त्य का रूप धारण कर शुक से कहा कि तुम मुझे " मांसयुक्त " भोजन कराओ। तब शुक ने मांसाहारी भोजन तैयार किया। जब स्नान कर वापस ऋषि अगस्त्य आए , तब उस दुष्ट राक्षस ने शुक की पत्नी को आश्रम के भीतर मूर्छित कर दिया और स्वयं शुक की पत्नी का रूप धारण कर ऋषि अगस्त्य को मांसाहारी भोजन परोस कर अंतर्धान हो गया। मांसाहारी भोजन देखकर ऋषि अगस्त्य क्रोधित हुए और शुक को शाप दे दिया - " तुम मनुष्यभोजी राक्षस होकर रहो। " तब शुक ने डरते-डरते कहा कि आप ही ने तो मांस बनाने के लिए कहा था। तब अगस्त्य जी ने ध्यानस्थ होकर सारी बातें जान लीं। तब ऋषि अगस्त्य ने कहा कि मेरा वचन वृथा जाने वाला नहीं है। अतः तुम राक्षस का शरीर धारण कर रावण का दूत बन कर रहोगे और जब तुम दूत होकर प्रभु श्री राम के पास जाओगे और उनका दर्शन करोगे , तो शापमुक्त हो जाओगे। अब वही शुक प्रभु श्री राम की शरण में आकर राक्षस योनि से मुक्त हो गया। पूर्ववद्ब्राह्मणो भूत्वा स्थितो वैखानसै: सह।। पूर्ववत् ब्राह्मण शरीर पाकर वह पुनः वानप्रस्थों के साथ रहने लगा। ( महादेव शिव जी के माध्यम से उपर्युक्त कथा का संकेत तुलसीदास जी करते हैं। ) ।। श्री राम जय राम जय जय राम ।।

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Comments (9)

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Sep 5, 2025

बहुत ही सुन्दर पोस्ट है भाई आपकी 👌👌👌🙏🌹☺️

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Sep 5, 2025

गुरु कुम्हार शिश कुम्भ है, गढ़ गढ़ काढ़े खोट, अंतर हाथ सहार दे, बाहर मारे चोट 🙏🌹☺️ आपको शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🌹☺️

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 5, 2025

Happy Teachers Day 🙏 Subha Madhyarhna ki Subha Kamanayen 🙏 Prabhu Shri Ram Ji ki Aasirbad Aap pr Sadeib Bani Rahe 🌹🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 5, 2025

Bahut hi Sundar Prasanga 👌👌🙏 Jai Ho 🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 5, 2025

Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🙏🙏

SHREE SHARMA

SHREE SHARMA

Sep 5, 2025

🙏🙏🙏🙏

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 5, 2025

🙏🙏🙏🙏🙏

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 5, 2025

📚।।हैप्पी टीचर्स डे।।📚 सुप्रभात शुभ शुक्रवार 5 सितंबर 2025 आप सभी को हैप्पी टीचर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएं।।📚📚

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 5, 2025

🌹🌹 जय श्री राम, श्री राम जय राम जय जय राम।। सुबह-सुबह की राम राम जी भाई जी //@वेरी वेरी नाइस पोस्ट स्टोरी।। प्रभु श्री राम भक्त हनुमान जी की कृपा आप पर सदैव बनी रहे ,आपका दिन शुभ हो।।🌹🌹