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9.2.2026 बहुत से लोग व्यर्थ की चिंताएं करते रहते हैं। जैसे कि, *"कभी ऐसा न हो जाए। कभी वैसा न हो जाए। कभी ट्रेन लेट न हो जाए। कभी फ्लाइट लेट न हो जाए। कभी वह व्यक्ति मेरे बारे में कुछ उल्टा सीधा न बोल दे। कभी कोई मुझ पर झूठा आरोप न लगा दे इत्यादि।"* ऐसी व्यर्थ की चिंताएं करने से व्यक्ति में भय उत्पन्न होता है। *"ये दोनों = व्यर्थ की चिंताएं और भय, मानसिक रोग हैं। ये आपके आत्म विश्वास के विनाशक हैं। इनसे बचने का प्रयत्न करें।"* *"आप जो व्यर्थ की चिंताएं करते हैं, उनमें से 80% घटनाएं तो होती ही नहीं। वे केवल आपकी चिंताएं मात्र हैं, और वह भी व्यर्थ की। क्योंकि ऐसा होता नहीं, इसलिए वे व्यर्थ की चिंताएं हैं।"* *"और जो 20% घटनाएं होने की संभावना होती है, उनको आप रोक नहीं सकते। क्योंकि दूसरे लोग या सारी परिस्थितियां आपके अधिकार में नहीं हैं, कि "वह मेरे बारे में कुछ उल्टा सीधा न बोल दे। यदि वह बोल भी देगा, तो आप क्या कर लेंगे? उसका दिमाग आपके नियंत्रण में नहीं है। उसकी वाणी आपके नियंत्रण में नहीं है। वह आपके विषय में कुछ भी सोच सकता है और कुछ भी बोल सकता है। तो व्यर्थ चिंता करने से क्या लाभ? अतः ऐसी चिंताएं न करें।"* बल्कि यह तो संसार की रीति है। यद्यपि यह रीति है तो गलत। परंतु यह संसार है, यहां ऐसा होता ही है। *"जो घटना यहां होती ही है, उसको स्वीकार करना चाहिए। और उसका उपाय सोचना चाहिए।"* कैसे? इस प्रकार से --- *"आप दूसरे के दिमाग और वाणी पर कंट्रोल नहीं कर सकते। हां, अपने ऊपर कंट्रोल कर सकते हैं। तो आप ऐसी तैयारी कर सकते हैं,कि *"यदि वह ऐसा बोलेगा, मुझ पर कोई आरोप लगाएगा, तो मैं अपने मन बुद्धि को शांत रखने के लिए क्या करूंगा?"* आप यह कर सकते हैं। "यदि कोई व्यक्ति आप पर कोई आरोप लगाता है, तो उसको शांति से सुनें। यदि वह झूठा आरोप है, आपने वैसी कोई गलती की ही नहीं, तो फिर चिंता किस बात की? अपना मस्त रहिए। और अपने मन में कहिए *"मूर्ख आदमी है। झूठा आरोप लगाता है। इसकी क्या परवाह करनी!"* बस, आपका मन बुद्धि शांत रहेगा। *"और उसने जो आरोप लगाया है, उसमें यदि कुछ सच्चाई है, तो उस सच्चाई को स्वीकार करें। अपने उस दोष को दूर करें। तो भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। तब भी आप प्रसन्न रह सकते हैं।"* अधिक से अधिक आप इतना कर सकते हैं, कि जब वह व्यक्ति आपका स्पष्टीकरण सुनने के मूड में हो, तब उसे अपना स्पष्टीकरण सुना दें कि *"आपने जो आरोप लगाया था, वह झूठा है। मैंने ऐसी कोई गलती नहीं की। चाहें तो आप परीक्षा कर सकते हैं।" "फिर यदि वह आपका स्पष्टीकरण स्वीकार करे, तो ठीक है। यदि ना करे, तो भी कोई चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि जब आपने कोई गलती की ही नहीं, तो फिर व्यर्थ चिंता क्यों करनी?"* और दूसरी बात -- *"उसके द्वारा झूठा आरोप लगाने से जो समाज में आपके विरुद्ध भ्रांति फैल गई। इस संबंध में आप इतना कर सकते हैं, कि आप अपना स्पष्टीकरण समाज के 2/4 बुद्धिमान लोगों को बता दें। वे आपकी बात को समझ लेंगे और आपके विरुद्ध जो भ्रांति समाज में फैली होगी, वे स्वयं उसे दूर कर देंगे।"* इसलिए चिंता तो कभी भी न करें। बस इतना ही पुरुषार्थ करें, जैसा कि ऊपर बताया है। *"यदि आप इतना सोचना सीख लें, और इस प्रकार से अपना मानसिक विचार एवं व्यवहार बनाएं, तो आप हर परिस्थिति में खुश रह सकते हैं। यही प्रसन्नता पूर्वक जीवन जीने का रहस्य है।"* *"आशा है, इस रहस्य को जानकर आप इससे लाभ उठाएंगे। व्यर्थ की चिंताएं नहीं करेंगे और आनन्दपूर्वक अपना जीवन जिएंगे।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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Comments (1)

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Feb 9, 2026

*जय भोले नाथ जी!* 🙏💫 मेरे सभी भाई बहनो को सोमवार की राम राम जी 🙏 आपको और आपके परिवार को सोमवार की राम राम जी! भगवान शिव की कृपा आप पर सदा बनी रहे। उनकी कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो। 🌟 🙏जय भोले नाथ जी!* 🙏💫 आपको सोमवार की शुभकामना:* भगवान शिव की कृपा से आपके जीवन में सभी मनोकामनाएं पूरी हों और आपको सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति हो। 🌟