MyMandirInstall

पौराणिक कथाओं और लोक मान्यताओं के अनुसार, नागराज (वासुकी या शेषनाग) का दरबार 'पाताल लोक' या 'नागलोक' में स्थित माना जाता है। भारत में ऐसी कई रहस्यमयी जगहें हैं जिन्हें पाताल लोक से पृथ्वी तक आने-जाने का रास्ता या 'द्वार' माना जाता है। यहाँ कुछ प्रमुख स्थानों और उनसे जुड़ी मान्यताओं का विवरण दिया गया है: 1. नागद्वार (सतपुड़ा की पहाड़ियाँ, मध्य प्रदेश) मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में पचमढ़ी के पास सतपुड़ा के घने जंगलों में 'नागद्वार' नामक एक गुफा है। * मान्यता: कहा जाता है कि इस गुफा का रास्ता सीधा नागलोक (पाताल) को जाता है। यहाँ हर साल नागपंचमी के समय एक कठिन पैदल यात्रा होती है, जिसे 'नागद्वारी यात्रा' कहते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहाँ नागराज वासुकी का दरबार लगता है। * विशेषता: यह रास्ता अत्यंत दुर्गम है और गहरी खाइयों से भरा है। 2. पाताल भुवनेश्वर गुफा (उत्तराखंड) उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित यह एक विशाल प्राकृतिक भूमिगत गुफा है। * मान्यता: स्कंद पुराण के मानस खंड के अनुसार, यहाँ के पत्थर और आकृतियाँ नागों के राजा शेषनाग के फन और उनके दरबार का आभास कराती हैं। यहाँ शेषनाग ने पृथ्वी का भार अपने फन पर उठा रखा है, ऐसी आकृति दिखाई देती है। * रास्ता: ऐसा माना जाता है कि यहाँ से चार द्वार थे (रणद्वार, पापद्वार, धर्मद्वार और मोक्षद्वार), जो अलग-अलग लोकों से जुड़े थे। 3. कारकोट नाग तीर्थ (वाराणसी, उत्तर प्रदेश) वाराणसी के जैतपुरा क्षेत्र में स्थित इस कुंड को नागलोक का द्वार माना जाता है। * मान्यता: पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, यह स्थान पाताल लोक जाने का मुख्य मार्ग है। यहाँ के कुंड की गहराई का आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है। नागपंचमी पर यहाँ नागराज की विशेष पूजा होती है। 4. कोतेबीरा धाम (छत्तीसगढ़) छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में एक गुफा है जिसे स्थानीय लोग 'नागलोक का द्वार' कहते हैं। यहाँ भी यह मान्यता प्रचलित है कि यह सुरंग सीधे पृथ्वी के नीचे नागों की दुनिया तक जाती है। पौराणिक संदर्भ: * नागलोक की स्थिति: शास्त्रों के अनुसार, पृथ्वी के नीचे सात लोक हैं—अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल। नागों का राजा वासुकी 'पाताल लोक' में भोगवती पूरी नामक नगरी में निवास करता है। * आने-जाने का साधन: कथाओं के अनुसार, नाग और देवता अपनी दिव्य शक्तियों से एक लोक से दूसरे लोक की यात्रा करते थे। मनुष्यों के लिए ये द्वार जल (समुद्र, नदियाँ, कुंड) या घने जंगलों की गहरी गुफाओं के रूप में बताए गए हैं।

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!