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4.8.2026 *"इसमें कोई संदेह नहीं है कि पढ़ाई लिखाई करना, डिग्रियां प्राप्त करना, धन कमाना, मकान बंगला बनाना आदि, ये सब संपत्तियां हैं।"* परंतु इन सब संपत्तियों से भी बड़ी, कुछ और संपत्तियां भी हैं। *"जैसे यदि आपके कान दूसरों का दुख ध्यान से सुनते हैं। आपके हृदय में दूसरों के प्रति प्रेम और करुणा है। आपके हाथ दूसरों की सेवा के लिए सदा तैयार रहते हैं। तो ये संपत्तियां आपकी पढ़ाई लिखाई और डिग्रियों से बड़ी हैं।"* *"आजकल लोग पढ़ाई लिखाई कर रहे हैं। गूगल तथा ए आई से बहुत सी जानकारियां प्राप्त कर रहे हैं। और इसी में अपनी पूरी सफलता मान रहे हैं। यह उनकी भूल है। तथा प्रेम करुणा सेवा दया परोपकार आदि गुणों की ओर उनका ध्यान लगभग 'न के बराबर' है।"* *"अतः आप पढ़ाई लिखाई अवश्य करें। जानकारियां अवश्य बढ़ाएं। परंतु इसके साथ-साथ दूसरों के प्रति प्रेम सेवा करुणा आदि, ये सब संपत्तियां भी अवश्य प्राप्त करें। तभी आप वास्तव में संपत्तिशाली कहलाएंगे, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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Comments (1)

Savita om namah shivay 🙏🌹

Savita om namah shivay 🙏🌹

Aug 4, 2026

RADHE RADHE 🙏🌹 NICE JI